“नाकाम मोहब्बत” हिंदी कविता, शायरी / Hindi Poetry Nakam Mohabbat

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   Nakam Mohabbat Hindi Kavita Shayari / Hindi Kavita Nakam Mohabbat / हिंदी शायरी नाकाम मोहब्बत।   Nakam Mohabbat Hindi Poetry   कविता- “नाकाम मोहब्बत” तेरी यादों के साए में, मैं अक्सर खो जाता हूँ, भीड़ में रहते हुए भी, तन्हा-सा हो जाता हूँ। तेरे ख्यालों की बारिश, हर पल मुझ पर बरसती है, दिल की हर एक धड़कन, बस तेरा नाम ही कहती है। कभी जो हँसते थे हम, चाँदनी रातों के नीचे, आज वही चाँद भी लगता है, जैसे हो मुझसे खींचे। तेरी बातें, तेरी हँसी, सब कुछ जैसे सपना था, जो अपना था कभी दिल से, अब बस एक अफसाना था। मैंने चाहा तुझे इतना, जितना खुद को भी नहीं, तू ही मेरी दुनिया थी, और कोई भी नहीं। पर शायद मेरी किस्मत को, ये मंज़ूर न था, तेरे साथ चलना मेरे लिए, लिखा ही न था। तेरी आँखों में जो चमक थी, अब किसी और के लिए है, मेरी हर एक उम्मीद अब, टूटकर बिखरी हुई है। मैंने हर दर्द को अपने, चुपचाप सह लिया, तेरे बिना जीने का हुनर भी, जैसे सीख लिया। मोहब्बत मेरी सच्ची थी, इसमें कोई कमी न थी, बस तेरी चाहत में शायद, मेरी कोई जगह न थी। मैंने हर लम्हा तेरे नाम कर दिया था, और तूने उसे बस एक खेल ...

"सच्चाई की जीत” हिन्दी नैतिक कहानी / Hindi Moral Story

  


हिंदी नैतिक कहानी “सच्चाई का इनाम” / Hindi Moral Story : Sachhai Ki Jeet.




हिन्दी कहानी- “सच्चाई का इनाम”



एक छोटे से गाँव में रामू नाम का एक लड़का रहता था। रामू बहुत गरीब था, लेकिन वह बहुत ईमानदार और परिश्रमी था। उसका सपना था कि वह पढ़-लिखकर एक अच्छा इंसान बने और अपने परिवार का सहारा बने। उसके माता-पिता मजदूरी करके अपना गुजारा करते थे। रामू भी स्कूल के बाद गाँव में छोटे-मोटे काम करके अपने माता-पिता की मदद करता था।


रामू के गाँव के पास एक बड़ा जंगल था। उस जंगल में एक बड़ा बगीचा था, जिसमें सुंदर और स्वादिष्ट फल उगते थे। गाँव के सभी बच्चे उस बगीचे में खेलने जाया करते थे, लेकिन रामू का मन हमेशा अपने काम में लगा रहता था। एक दिन रामू जंगल में लकड़ी काटने गया। लकड़ी काटते-काटते उसने देखा कि एक बूढ़ा आदमी एक पेड़ के नीचे बेहोश पड़ा है। रामू ने बिना सोचे-समझे उस बूढ़े आदमी की मदद करने का फैसला किया। उसने अपने पास के पानी से बूढ़े आदमी को होश में लाया और उसे अपने घर ले आया। 


बूढ़े आदमी का नाम मोहनलाल था। वे बहुत अमीर व्यापारी थे, जो व्यापार के सिलसिले में गाँव आए थे। उन्होंने रामू की ईमानदारी और उसकी मदद के जज़्बे को देखा और उसे बहुत सराहा। मोहनलाल ने रामू के माता-पिता से कहा, "आपका बेटा बहुत नेक और ईमानदार है। मैं इसका भविष्य उज्ज्वल देखना चाहता हूँ। मैं इसे अपने साथ शहर ले जाकर अच्छी शिक्षा दिलवाऊँगा।"


रामू के माता-पिता ने मोहनलाल जी की बात मानी और रामू को उनके साथ भेज दिया। शहर पहुँचकर रामू ने पढ़ाई में अपनी पूरी मेहनत लगा दी। वह दिन-रात पढ़ाई करता और अपनी ईमानदारी और परिश्रम से अपने गुरुओं और साथियों का दिल जीत लेता। 


कुछ साल बाद, रामू ने अपनी शिक्षा पूरी कर ली और एक बड़े इंजीनियर के पद पर नियुक्त हो गया। उसने अपने माता-पिता को शहर बुला लिया और उनकी सेवा करने लगा। उसने अपने गाँव की स्थिति भी सुधारी। अब रामू के गाँव में स्कूल, अस्पताल और पक्की सड़कें भी थीं। गाँव के लोग रामू की बहुत तारीफ करते थे और कहते थे कि रामू की सच्चाई और मेहनत ने उसे एक दिन बड़ा आदमी बना दिया।


इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि सच्चाई और मेहनत का फल हमेशा मीठा होता है। हमें कभी भी अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए, क्योंकि सच्चाई का इनाम भगवान भी देता है।


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