“कछुआ और खरगोश” हिंदी शिक्षाप्रद कहानी / Kachua Aur Khargosh Story In Hindi

Kachhua Aur Khargosh Ki Kahani / Rabbit And Tortoise Hindi Story / कछुआ और खरगोश की कहानी । कहानी: कछुआ और खरगोश बहुत समय पहले की बात है। एक हरा-भरा जंगल था। उस जंगल में ऊँचे-ऊँचे पेड़, रंग-बिरंगे फूल, मीठे फल और साफ़ बहती नदी थी। जंगल में कई तरह के जानवर रहते थे—हाथी, शेर, हिरण, बंदर, तोता, मोर और भी बहुत से। सभी जानवर आपस में मिल-जुलकर रहते थे। उसी जंगल में एक खरगोश और एक कछुआ भी रहते थे। दोनों की प्रकृति एक-दूसरे से बिल्कुल अलग थी। यही अंतर आगे चलकर एक बड़ी सीख देने वाली कहानी बन गया। खरगोश बहुत तेज़ दौड़ता था। वह अपने तेज़ पैरों पर बहुत घमंड करता था। उसे लगता था कि जंगल में उससे तेज़ कोई नहीं है। वह अकसर दूसरों का मज़ाक उड़ाता था। जब भी कोई जानवर धीरे चलता, खरगोश हँसते हुए कहता, “अरे! तुम लोग तो बहुत ही सुस्त हो। अगर मैं चाहूँ, तो एक ही पल में जंगल का चक्कर लगा आऊँ।” जानवर चुप रहते, क्योंकि वे जानते थे कि खरगोश सच में तेज़ है, लेकिन उसका व्यवहार अच्छा नहीं था। कछुआ इसके बिल्कुल उलट था। वह बहुत धीरे चलता था, लेकिन बहुत समझदार और धैर्यवान था। वह किसी का मज़ाक नहीं उड़ाता और न ही किसी...

आस्तीन का सांप मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Aasteen Ka Saanp Meaning In Hindi


Aastin Ka Sanp Muhavre Ka Arth Aur Vakya Prayog / आस्तीन का साँप मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

 

आस्तीन का सांप मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Aasteen Ka Saanp Meaning In Hindi
Aasteen Ka Saanp






मुहावरा- “आस्तीन का सांप” ।


( Muhavara- Aasteen Ka Saanp )



अर्थ- मित्रता की ओट में छिपा हुआ शत्रु / जो मित्र होकर धोखा दे / कपटी मित्र / साथ रहकर विश्वसघात करने वाला व्यक्ति / मित्र बनकर छल करने वाला / अपनेपन का दिखावा करके धोखा देना ।


( Arth/Meaning in Hindi- Mitrata Ki Ot Me Chhipa Hua Shatru / Jo Mitra Hokar Dhokha De / Kapti Mitra / Sath Rahkar Vishwas ghat Karne Wala Vyakti / Mitra Bankar Chhal Karne Wala / Apnepan Ka Dikhawa Karke Dhokha Dena )





 

“आस्तीन का सांप” मुहावरे का अर्थ/व्याख्या इस प्रकार है-


आस्तीन का सांप”, यह हिंदी भाषा में प्रयुक्त होने वाला एक प्रचलित, लोकप्रिया और अतिमहत्वपूर्ण मुहावरा है । इस मुहावरे का अर्थ यह होता है कि कोई ऐसा व्यक्ति जो हमारा मित्र या अपना करीबी रहते हुए भी हमसे छल करता है और अंदर ही अंदर हमारी जड़े काटने पर लगा रहता है । अर्थात कि इस मुहावरे का अर्थ मित्र की ओट में छिपा हुआ शत्रु या यूँ कहें कि कपटी मित्र होता है ।


आस्तीन का सांप” एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है जो किसी के अंदर छिपी हुई असलियत या ख़तरनाक सच्चाई को दर्शाता है । इस मुहावरे का उपयोग आमतौर पर किसी की धोखेबाज़ी, बेईमानी या विश्वासघात की परिस्थितियों को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है ।


उदाहरण के लिए, यदि किसी व्यक्ति ने किसी को धोखा दिया हो और बाद में उसकी असलियत सामने आई हो, तो उसके लिए कहा जा सकता है कि वह तो “आस्तीन का सांप” निकला । इससे समझा जा सकता है कि वह व्यक्ति जिसपर हमने पहले से ही भरोसा किया था, वह असल में बेईमान और धोकेबाज़ था । अर्थात कि इस मुहावरे के उपयोग करने से उस व्यक्ति की असलियत सामने आती है ।


जैसे-


1. प्रताप ने अपने दल के कुछ सदस्यों को सचेत किया कि सावधान रहना ! हमारे दल में बहुत से आस्तीन के साँप घुस आये हैं ।


2. गृजेश ने ये दिखाने की बहुत कोशिश की, कि वह अपने दोस्तों का बहुत खास है और उससे बड़ा वफादार कोई और नही है, लेकिन गृजेश के खिलाफ़ जोरदार प्रमाण मिला कि वह दोस्तों के बिच एक आस्तीन का सांप है ।


3. दीपक ने किसी तरह से सिफारीश करके मोहिनी को अपने कम्पनी में नौकरी दिलवाई और उल्टा मोहनी ने दीपक को ही नौकरी से निकलवा दिया । मतलब कि मोहिनी मित्र की ओट में छिपी हुई शत्रु निकली अर्थात मोहिनी आस्तीन का सांप निकल गयी ।


4. मैने गोपी से बोला कि यार तुम तो आस्तीन के सांप निकले, जिस बहन ने तुम्हे पाल-पोस के बड़ा किया और अपने घर में रखा तुमने उसी का दौलत हड़प लिया ।


5. सोनिया जिसे अपना पति और भगवान मानती थी उसी ने दौलत के लालच में आकर उसके भाई की हत्या की थी । सोनिया को जैसे ही इस बात का पता चला, उसने अपने पति से बोला कि तुम्हें तो मै अपना भगवान मानती थी, पर तुम तो आस्तीन के सांप निकले ।



“आस्तीन का सांप” मुहावरे का वाक्य प्रयोग / Aastin Ka Sanp Muhavare Ka Vakya Prayog. 


आस्तीन का सांप” इस मुहावरे का अर्थ नीचे दिए गए कुछ वाक्य प्रयोगों के माध्यम से समझ सकते हैं, जो कि इस प्रकार से हैं -



वाक्य प्रयोग- 1.


सोनू और मोनू दोनो बचपन के दोस्त थे । दोनों में बहुत गहरी दोस्ती थी । लोग इन दोनो की दोस्ती का मिशाल देते थे और कहते थे कि ऐसे दोस्त बहुत कम देखने को मिलते हैं । पर धारे-धीरे समय बीतता गया और दोनों अपने-अपने कामों में व्यस्त रहने लगे । सोनू अपनी मेहनत से एक बड़ी सी कम्पनी खड़ा कर लिया था और वही मोनू अभी भी छोटा मोटा काम करता था । सोनू को जब ये पता चला तो उसने मोनू को बुलाकर अपने कम्पनी में काम पर रख लिया । समय बीतता गया और मोनू अपनी काबिलियत से सोनू का भरोसा जीतता चला गया । एक दिन सोनू ने मोनू को अपने कम्पनी का केयरटेकर बना दिया और खुद कम्पनी के काम से कुछ दिनों के लिए विदेश चला गया । बाद में मोनू ने इसका फायदा उठा कर कम्पनी अपने नाम करवा लिया । जब सोनू वापस आया तो उसे इस बात का पता चला तो उस मोनू के पास गया । सोनू ने मोनू से कहा कि दोस्त मैंने तुम्हारे उपर भरोषा करके तुम्हे कम्पनी का केयरटेकर बनाया और तुमने मेरे साथ रहकर मुझसे ही छल कर दिया । मोनू तुम तो आस्तीन के सांप निकले, जब मित्र ही मित्र को धोखा देने लगेंगे तो कौन अपने मित्रों पर भरोसा करेगा । सोनू ने आगे कहा कि दोस्त तुमने आज मुझे ये दिखा दिया कि आखिर में आस्तीन के सांप होते कैसे हैं ।



वाक्य प्रयोग- 2.


मरियम की सादी के बाद उसकी मुहबोली बहन घर पर अकेली रह गयी । मरियम ने अपने पति की अनुमति से अपनी मुहबोली बहन को अपने घर में रहने के लिए बुला ली । पर ये क्या मरियम की मुहबोली बहन तो आस्तीन की सांप निकल गयी । मरियम की बहन उसके और उसके पति के बीच में आएदिन झड़गा करवा देती थी । पति-पत्नी के बिच लड़ाई झगड़ा इतना ज्यादा बड़ गया कि मरियम के पति ने उसकी मुहबोली बहन से सादी कर लिया । मरियम ने अपनी बहन से बोला कि बहन मैंने तुमपे तरस खा के तुम्हे अपने घर में रहने के लिए बुलाया और तुमने मेरे पति को बहला फुसला कर उससे सादी कर ली । तुम बहन कहने के लायक भी नही हो, तुम वो आस्तीन की सांप हो, जिसने अपनी बहन का बसा बसाया घर उजाड़ दिया ।



वाक्य प्रयोग- 3.


मोहित ने कहा की जिस व्यक्ति को मै अपना सबसे भरोसेमंद समझता था, आज वही आस्तीन का सांप निकला ।

मोहित और सुरेश दोनों मिलकर एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे । प्रोजेक्ट लगभग पुरा हो चुका था । इससे पहले कि मोहित उस प्रोजेक्ट के बारे में सुरेश से कुछ बोलता, उससे पहले ही सुरेश उस प्रोजेक्ट को लेकर एक दूसरी कम्पनी के पास चला गया और उसे अपना प्रोजेक्ट बता कर उसे खूब सारे पैसे में बेच दिया । मोहित को इस बात पर बहुत दुःख हुआ । मोहित जिसके साथ मिलकर इतना मेहनत किया उसी ने मोहित के साथ छल कर दिया । अर्थात सुरेश ने उस प्रोजेक्ट को चुरा कर खुद को ये साबित कर दिया कि वह आस्तीन का सांप है । 



दोस्तों, हम आशा करतें हैं कि आपको इस मुहावरे का अर्थ समझ में आ गया होगा । अपने सुझाव देने के लिए हमें कमैंट्स जरूर करें ।


आपका दिन शुभ हो ! 😊


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