हिंदी कविता “आजकल के रिश्ते” / Aajkal Ke Rishtey Hindi Kavita
Hindi Kavita Aajkal Ke Rishtey / Hindi Poem Aajkal Ke Rishtey / कविता आजकल के रिश्ते। कविता आजकल के रिश्ते आजकल रिश्ते मोबाइल की बैटरी जैसे हो गए हैं, ज़रा सी कमी आई नहीं कि लोग चार्ज करने की बजाय उसे बदल देना आसान समझते हैं। कभी जो साथ बैठकर घंटों बातें किया करते थे, आज वही लोग "टाइम नहीं है" कहकर चुप्पी ओढ़ लेते हैं। रिश्ते अब बोझ लगने लगे हैं, जिन्हें निभाने के लिए सब्र चाहिए, समझ चाहिए, और थोड़ा सा अपना वक़्त भी... पर अब किसके पास है ये सब? हर कोई जल्दी में है, हर कोई खुद में उलझा है, और इसी उलझन में किसी का हाथ थामने की बजाय उसे छोड़ देना आसान लगने लगा है। पहले रिश्ते टूटते नहीं थे, थोड़े झुक जाते थे, थोड़ा संभल जाते थे, और फिर से जुड़ जाते थे… पर अब, एक छोटी सी गलतफहमी भी दीवार बन जाती है, और लोग कोशिश करने से पहले ही हार मान लेते हैं। काश कोई समझ पाता कि रिश्ते वक्त मांगते हैं, पर वही वक्त सबसे खूबसूरत यादें भी बनाता है। रिश्ते छोड़ना आसान है, पर उन्हें जोड़ना ही असली कला है… और शायद हम ये कला धीरे-धीरे भूलते जा रहे हैं।
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