“घाव पर मरहम लगाना” मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Ghav Par Marham Lagana Meaning In Hindi
Ghav Par Marham Lagana Muhavare Ka Arth Aur Vakya Prayog / घाव पर मरहम लगाना मुहावरे का क्या मतलब होता है?
मुहावरा- “घाव पर मरहम लगाना”।
(Muhavara- Ghav Par Marham Lagana)
अर्थ- दुःखी या पीड़ित व्यक्ति को तसल्ली देना, सांत्वना देना या राहत पहुंचाना ।
(Arth- Dukhi Ya Pidit Vyakti Ko Tasalli Dena, Santvna Dena Ya Rahat Pahuchana)
“घाव पर मरहम लगाना” मुहावरे का अर्थ/व्याख्या इस प्रकार है-
परिचय:
हिंदी भाषा में मुहावरों का विशेष महत्व है। मुहावरे भाषा को न केवल प्रभावशाली बनाते हैं, बल्कि भावों को संक्षिप्त, सजीव और रोचक ढंग से प्रस्तुत करने में भी सहायक होते हैं। ऐसा ही एक प्रचलित और अर्थपूर्ण मुहावरा है — “घाव पर मरहम लगाना”। यह मुहावरा जीवन के व्यवहारिक अनुभवों से जुड़ा हुआ है और दैनिक जीवन में अक्सर प्रयोग किया जाता है।
मुहावरे का शाब्दिक अर्थ:
शाब्दिक रूप से “घाव पर मरहम लगाना” का अर्थ है किसी चोट या जख्म पर दवा या मरहम लगाना, जिससे दर्द कम हो और घाव जल्दी भर जाए। जब शरीर पर कोई घाव होता है, तो मरहम लगाने से राहत मिलती है और पीड़ा में कमी आती है। इसी वास्तविक अनुभव से यह मुहावरा बना है।
मुहावरे का भावार्थ:
भावार्थ में यह मुहावरा उस स्थिति को दर्शाता है जब किसी दुखी, पीड़ित या संकट में फँसे व्यक्ति को सांत्वना, सहारा या मदद दी जाती है, जिससे उसका मानसिक या भावनात्मक कष्ट कम हो जाए। जब कोई व्यक्ति दुख, हानि, अपमान या असफलता से गुजर रहा हो और कोई दूसरा व्यक्ति अपने शब्दों, व्यवहार या सहायता से उसके दर्द को कम करने का प्रयास करे, तो कहा जाता है कि उसने “घाव पर मरहम लगाया”।
मुहावरे का प्रयोग और संदर्भ:
यह मुहावरा प्रायः मानवीय संवेदनाओं, सहानुभूति और करुणा को व्यक्त करने के लिए प्रयोग किया जाता है। जैसे—
*किसी प्रियजन की मृत्यु के बाद सांत्वना देना
*आर्थिक हानि झेल रहे व्यक्ति को सहायता देना
*असफल छात्र को हौसला देना
*दुखी मित्र को समझाकर उसका मन हल्का करना
इन सभी परिस्थितियों में वास्तविक घाव नहीं होता, बल्कि मन पर लगे घाव होते हैं। ऐसे में दी गई सहायता या सांत्वना “मरहम” का कार्य करती है।
समाज और जीवन में महत्त्व:
मानव एक सामाजिक प्राणी है। समाज में हर व्यक्ति कभी न कभी दुख, संकट या परेशानी का सामना करता है। ऐसे समय में यदि उसे सहयोग, सहानुभूति और प्रेम मिले, तो उसका आत्मबल बढ़ता है। “घाव पर मरहम लगाना” इसी सामाजिक भावना का प्रतीक है। यह मुहावरा हमें यह सिखाता है कि केवल अपने बारे में सोचना ही नहीं, बल्कि दूसरों के दुख को समझना और उसमें सहभागी बनना भी आवश्यक है।
नैतिक और भावनात्मक पक्ष:
यह मुहावरा करुणा, मानवता और संवेदनशीलता का संदेश देता है। जब कोई व्यक्ति दूसरे के दर्द को अपना दर्द समझकर उसकी मदद करता है, तो वह न केवल सामने वाले के घाव पर मरहम लगाता है, बल्कि समाज में सकारात्मकता भी फैलाता है। ऐसे व्यवहार से आपसी संबंध मजबूत होते हैं और विश्वास की भावना विकसित होती है।
उदाहरण द्वारा व्याख्या:
मान लीजिए एक विद्यार्थी परीक्षा में असफल हो जाता है। वह निराश और दुखी है। यदि उसके माता-पिता उसे डाँटने के बजाय समझाएँ, उसकी कमियों को प्यार से बताएं और भविष्य के लिए प्रोत्साहित करें, तो यह उसके मन के घाव पर मरहम लगाने जैसा होगा। इसी प्रकार, यदि किसी किसान की फसल नष्ट हो जाए और सरकार या समाज उसकी आर्थिक सहायता करे, तो वह सहायता उसके जीवन के घाव पर मरहम का कार्य करती है।
“घाव पर मरहम लगाना” मुहावरे का वाक्य प्रयोग / Ghav Par Marham Lagana Muhavare Ka Vakya Prayog.
1.बेटे की असफलता पर पिता के समझाने वाले शब्द उसके घाव पर मरहम लगाने जैसे थे।
2.दुर्घटना के बाद मित्रों की मदद ने उसके मन के घाव पर मरहम लगा दिया।
3.गरीबी में फँसे परिवार को मिली सहायता उनके घाव पर मरहम साबित हुई।
4.माँ की ममता भरी बातों ने बच्चे के दिल के घाव पर मरहम लगा दिया।
5.नौकरी छूटने के बाद नया अवसर मिलना उसके लिए घाव पर मरहम था।
6.हार के बाद कोच का प्रोत्साहन खिलाड़ियों के घाव पर मरहम बन गया।
7.शिक्षक की सराहना ने छात्र की निराशा के घाव पर मरहम लगाया।
8.दुख की घड़ी में मित्र का साथ घाव पर मरहम लगाने जैसा होता है।
9.सरकार की राहत योजना ने पीड़ितों के घाव पर मरहम लगाया।
10.किसी अपने की एक मुस्कान भी कभी-कभी घाव पर मरहम बन जाती है।
11.असफलता के समय मिले स्नेह ने उसके घाव पर मरहम लगा दिया।
12.कठिन समय में दिया गया सहयोग घाव पर मरहम के समान होता है।
13.उसकी सच्ची बातों ने मेरे मन के घाव पर मरहम लगाया।
14.बच्चों की हँसी ने बुज़ुर्ग के अकेलेपन के घाव पर मरहम लगाया।
15.समाज की सहायता ने पीड़ित महिला के घाव पर मरहम लगाया।
16.परीक्षा में कम अंक आने पर शिक्षक का समझाना घाव पर मरहम था।
17.दुःख के समय किसी का साथ मिलना घाव पर मरहम लगाने जैसा है।
18.भाई के भरोसे ने उसके टूटे मन के घाव पर मरहम लगाया।
19.प्राकृतिक आपदा के बाद राहत सामग्री घाव पर मरहम बनी।
20.मित्र की एक सलाह ने मेरे तनाव के घाव पर मरहम लगा दिया।
21.हार के बाद मिली प्रशंसा उसके लिए घाव पर मरहम थी।
22.माता-पिता का प्रेम हर घाव पर मरहम लगाने का काम करता है।
23.दुखी व्यक्ति को समझना ही उसके घाव पर मरहम लगाना है।
24.उसकी मदद ने गरीब बच्चे के जीवन के घाव पर मरहम लगाया।
25.शिक्षक की प्रेरणा ने छात्र के आत्मविश्वास के घाव पर मरहम लगाया।
26.विपत्ति में मिली थोड़ी-सी सहायता भी घाव पर मरहम बन जाती है।
27.सच्चा मित्र वही है जो कठिन समय में घाव पर मरहम लगाए।
28.उसके सहानुभूतिपूर्ण शब्द मेरे लिए घाव पर मरहम थे।
29.संकट के समय मिला सहयोग उसके घाव पर मरहम बन गया।
30.इंसानियत भरा व्यवहार हर दुख के घाव पर मरहम लगा देता है।
निष्कर्ष:
अंततः कहा जा सकता है कि “घाव पर मरहम लगाना” केवल एक मुहावरा नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक मानवीय सोच है। यह हमें सिखाता है कि दूसरों के दुख में सहभागी बनना, उन्हें सहारा देना और उनके दर्द को कम करने का प्रयास करना ही सच्ची मानवता है। जब हम किसी के टूटे हुए मन को अपने प्रेम, सहानुभूति और सहयोग से जोड़ते हैं, तब वास्तव में हम उसके घाव पर मरहम लगाते हैं।
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