“घास खोदना” मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Ghas Khodna Meaning In Hindi

 

Ghas Khodna Muhavare Ka Arth Aur Vakya Prayog / घास खोदना मुहावरे का क्या मतलब होता है?



मुहावरा- “घास खोदना”।

(Muhavara- Ghas Khodna)


अर्थ- तुच्छ या छोटा काम करना / समय बर्बाद करना / निरर्थक प्रयास करना ।

(Arth/Meaning in Hindi- Tuchh Ya Chhota Kam Karna / Samay Barbad Karna / Nirarthak Prayas Karna)



“घास खोदना” मुहावरे का अर्थ/व्याख्या इस प्रकार है- 


परिचय:

हिंदी भाषा में मुहावरों का विशेष महत्व है। मुहावरे भाषा को केवल प्रभावशाली ही नहीं बनाते, बल्कि भावों और परिस्थितियों को कम शब्दों में गहराई से व्यक्त करने में सहायता करते हैं। ऐसे ही मुहावरों में से एक है “घास खोदना”। यह मुहावरा सुनने में साधारण प्रतीत होता है, किंतु इसका अर्थ और भाव अत्यंत गूढ़ है। इसका प्रयोग प्रायः व्यंग्य, कटाक्ष और सामाजिक स्थितियों को उजागर करने के लिए किया जाता है।


मुहावरे का शाब्दिक अर्थ:

“घास खोदना” का शाब्दिक अर्थ है—ज़मीन से घास को खोदकर निकालना। यह कार्य देखने में अत्यंत कठिन, श्रमसाध्य और कम लाभ देने वाला माना जाता है। पुराने समय में जब किसी के पास कोई साधन या रोजगार नहीं होता था, तो वह जीविका चलाने के लिए छोटे-मोटे, अत्यंत कठिन और कम आमदनी वाले काम करता था। घास खोदना भी उन्हीं कार्यों में से एक था।


मुहावरे का भावार्थ:

मुहावरे के रूप में “घास खोदना” का अर्थ होता है—

*तुच्छ या बहुत ही छोटा काम करना,

*या मजबूरी में अपमानजनक या निम्न स्तर का काम करना।

कई बार इसका प्रयोग किसी व्यक्ति की दयनीय आर्थिक स्थिति या उसकी विवशता को दर्शाने के लिए किया जाता है। यह मुहावरा यह संकेत देता है कि व्यक्ति इतने बुरे हालात में है कि उसे पेट पालने के लिए भी कठिन और कम प्रतिष्ठित कार्य करने पड़ रहे हैं।


मुहावरे की व्याख्या:

“घास खोदना” मुहावरा समाज की उस सच्चाई को उजागर करता है जहाँ हर व्यक्ति को समान अवसर प्राप्त नहीं होते। कुछ लोग अत्यंत मेहनत करने के बाद भी जीवन में आगे नहीं बढ़ पाते। ऐसे में यह मुहावरा उनके संघर्ष, पीड़ा और विवशता का प्रतीक बन जाता है।

इस मुहावरे में परिश्रम के साथ-साथ असमानता और विडंबना का भाव भी छिपा है। कभी-कभी इसका प्रयोग व्यंग्य के रूप में किया जाता है, जैसे—

“इतनी पढ़ाई करने के बाद भी उसे घास खोदनी पड़ रही है।”

यह वाक्य शिक्षा व्यवस्था या सामाजिक ढांचे पर प्रश्नचिह्न लगाता है।


सामाजिक संदर्भ:

भारतीय समाज में श्रम को सम्मान देने की परंपरा रही है, लेकिन फिर भी कुछ कार्यों को “छोटा” समझ लिया जाता है। “घास खोदना” मुहावरा इसी मानसिकता को दर्शाता है। यह बताता है कि समाज किस प्रकार कुछ श्रम को कमतर आंकता है, जबकि वास्तव में हर श्रम का अपना महत्व होता है।

यह मुहावरा हमें यह भी सिखाता है कि परिस्थितियाँ कभी-कभी मनुष्य को ऐसे कार्य करने पर विवश कर देती हैं, जिन्हें वह स्वयं भी नहीं करना चाहता। ऐसे में यह मुहावरा करुणा और सहानुभूति का भाव भी उत्पन्न करता है।


“घास खोदना” मुहावरे का वाक्य प्रयोग / Ghas Khodna Muhavare Ka Vakya Prayog.


1.अत्यधिक गरीबी के कारण उसे परिवार पालने के लिए घास खोदनी पड़ी।

2.पढ़ा-लिखा होने के बाद भी बेरोज़गारी ने उसे घास खोदने पर मजबूर कर दिया।

3.उसने मेहनत से कभी जी नहीं चुराया, चाहे उसे घास ही क्यों न खोदनी पड़े।

4.गांव में कई लोग आज भी रोज़ी-रोटी के लिए घास खोदते हैं।

5.हालात इतने बिगड़ गए कि सम्मान छोड़कर घास खोदना ही एकमात्र रास्ता बचा।

6.व्यवस्था ऐसी है कि योग्य लोग घास खोदने को मजबूर हो जाते हैं।

7.उसने बच्चों की पढ़ाई के लिए घास खोदकर भी पैसे जुटाए।

8.जीवन की कठिनाइयों ने उसे घास खोदना सिखा दिया।

9.मेहनतकश व्यक्ति घास खोदकर भी ईमानदारी से जीवन यापन करता है।

10.अगर समय रहते अवसर न मिले, तो इंसान को घास खोदनी पड़ती है।

11.उसने कभी चोरी नहीं की, बल्कि जरूरत पड़ने पर घास खोदना स्वीकार किया।

12.समाज की उदासीनता ने उसे घास खोदने जैसी स्थिति में ला खड़ा किया।

13.वह किसी पर बोझ नहीं बनना चाहता था, इसलिए घास खोदकर गुज़ारा करता रहा।

14.विपरीत परिस्थितियों में भी उसने घास खोदकर आत्मसम्मान बनाए रखा।

15.गरीबी इंसान को घास खोदने जैसे कठिन कार्य करने पर विवश कर देती है।


शिक्षा और संदेश:

“घास खोदना” मुहावरा हमें परिश्रम का मूल्य समझाता है और यह भी सिखाता है कि किसी के काम को छोटा समझना उचित नहीं है। यह मुहावरा हमें संवेदनशील बनाता है और समाज में फैली आर्थिक विषमता पर विचार करने के लिए प्रेरित करता है।


निष्कर्ष:

अतः “घास खोदना” मुहावरा केवल कठिन श्रम का संकेत नहीं है, बल्कि यह जीवन के संघर्ष, विवशता, सामाजिक असमानता और मानवीय पीड़ा का प्रतीक है। यह मुहावरा भाषा को सशक्त बनाने के साथ-साथ हमें समाज की वास्तविकताओं से भी परिचित कराता है। हिंदी भाषा में ऐसे मुहावरों का प्रयोग भाषा को जीवंत और प्रभावशाली बनाता है, साथ ही जीवन के अनुभवों को गहराई से व्यक्त करता है।






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