“बुद्धिमान बकरी” शिक्षाप्रद हिंदी कहानी / Buddhiman Bakari Hindi Story
Buddhiman Bakari Hindi Kahani / Kahani Buddhiman Bakari / हिंदी कहानी बुद्धिमान बकरी।
![]() |
| Buddhiman Bakari |
शीर्षक: बुद्धिमान बकरी
बहुत समय पहले की बात है। एक हरे-भरे जंगल के पास एक छोटा-सा गाँव था। उस गाँव के चारों ओर खेत, तालाब और पेड़ों की लंबी कतारें थीं। गाँव के लोग सीधे-साधे, मेहनती और प्रकृति से प्रेम करने वाले थे। वे सुबह जल्दी उठते, अपने काम पर जाते और शाम को घर लौटकर परिवार के साथ समय बिताते।
उसी गाँव में एक किसान रहता था, जिसका नाम था रामदीन। रामदीन बहुत गरीब नहीं था, लेकिन अमीर भी नहीं था। उसके पास थोड़ी-सी ज़मीन, एक झोपड़ी और कुछ जानवर थे। उन्हीं जानवरों में एक बकरी थी, जिसका नाम उसने धनिया रखा था। धनिया देखने में साधारण बकरी थी, लेकिन उसमें एक खास बात थी—वह बहुत बुद्धिमान थी।
धनिया हर बात को ध्यान से सुनती और समझती थी। जब रामदीन या उसकी पत्नी आपस में बात करते, तो धनिया चुपचाप एक कोने में खड़ी होकर सब सुनती रहती। वह इंसानों की भाषा पूरी तरह नहीं समझ पाती थी, लेकिन शब्दों के भाव और इरादे को पहचान लेती थी।
हर सुबह रामदीन धनिया को खेतों के पास चरने के लिए ले जाता। वहाँ और भी कई किसानों की बकरियाँ और गायें आती थीं। ज़्यादातर जानवर बस घास खाने में लगे रहते, लेकिन धनिया आसपास के माहौल पर भी नज़र रखती। अगर कहीं कुत्ता दिख जाता या कोई अनजान आदमी आता, तो वह तुरंत सतर्क हो जाती।
एक दिन की बात है। गाँव के कुछ बच्चे तालाब के पास खेल रहे थे। खेल-खेल में एक छोटा बच्चा तालाब के गहरे पानी की ओर बढ़ गया। किसी ने ध्यान नहीं दिया। धनिया पास ही चर रही थी। उसने बच्चे को डगमगाते देखा और ज़ोर-ज़ोर से मिमियाने लगी। उसकी आवाज़ सुनकर रामदीन और दूसरे लोग दौड़कर आए और बच्चे को समय रहते बचा लिया।
उस दिन से गाँव के लोग कहने लगे,
“यह बकरी तो सच में बहुत समझदार है।”
उसी जंगल में एक बहुत चालाक लोमड़ी रहती थी। वह हमेशा मौका ढूँढती रहती कि कैसे किसी जानवर को धोखा देकर अपना पेट भरे। उसने सुना कि गाँव के पास एक बुद्धिमान बकरी रहती है। लोमड़ी के मन में विचार आया,
“अगर मैं उसे फँसा लूँ, तो कई दिनों का खाना मिल जाएगा।”
एक दिन लोमड़ी चुपचाप खेतों के पास आई और धनिया से मीठी आवाज़ में बोली,
“बहन बकरी, क्या तुम जानती हो कि जंगल के उस पार कितनी हरी और मीठी घास है? वहाँ खाने से शरीर मजबूत हो जाता है।”
धनिया समझ गई कि लोमड़ी की बातों में कुछ गड़बड़ है। उसने शांति से जवाब दिया,
“मुझे तो यहीं की घास अच्छी लगती है। और वैसे भी मैं अकेले जंगल में नहीं जाती।”
लोमड़ी मुस्कुराई और बोली,
“डरो मत, मैं तुम्हारे साथ चलूँगी।”
धनिया मन ही मन सोचने लगी,
“जो खुद चालाक हो, उस पर भरोसा करना ठीक नहीं।”
उसने कहा,
“अगर घास इतनी ही अच्छी है, तो तुम खुद क्यों नहीं खाती?”
यह सुनकर लोमड़ी झेंप गई और बिना कुछ बोले वहाँ से चली गई।
कुछ दिनों बाद गाँव में सूखा पड़ गया। खेतों की घास सूखने लगी। रामदीन बहुत परेशान था। उसने सोचा कि बकरियों को थोड़ी दूर जंगल की ओर ले जाना पड़ेगा।
उस दिन रामदीन धनिया को जंगल के किनारे छोड़कर खुद किसी काम से गाँव चला गया। धनिया अकेली थी। तभी वही चालाक लोमड़ी फिर से आ गई। इस बार उसके साथ एक भेड़िया भी था।
भेड़िया गुस्से से बोला,
“आज तो बचकर नहीं जा पाओगी।”
धनिया डरी जरूर, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने बुद्धि से काम लेने का निश्चय किया।
धनिया बोली,
“मुझे खाने से पहले मेरी एक बात सुन लो। अगर तुम मुझे अभी खा गए, तो सिर्फ एक समय का भोजन मिलेगा। लेकिन अगर मुझे ज़िंदा छोड़ दोगे, तो मैं तुम्हें रोज़ खाने का इंतज़ाम कर दूँगी।”
लोमड़ी और भेड़िया एक-दूसरे का मुँह देखने लगे।
भेड़िया बोला,
“यह कैसे संभव है?”
धनिया ने कहा,
“मैं किसान की बकरी हूँ। रोज़ यहाँ और जानवर आते हैं। मैं तुम्हें संकेत दे दिया करूँगी।”
लोमड़ी को शक हुआ, लेकिन लालच ज़्यादा था। उसने भेड़िए को समझाया,
“एक बार आज़मा लेते हैं।”
अगले दिन धनिया ने ज़ोर-ज़ोर से मिमियाना शुरू किया। आवाज़ सुनकर किसान और गाँव के लोग दौड़कर आ गए। उन्होंने जंगल में छिपे भेड़िए को देख लिया। सबने मिलकर भेड़िए और लोमड़ी को भगा दिया।
इसके बाद धनिया ने राहत की साँस ली। उसने अपनी बुद्धि से अपनी जान बचा ली थी।
गाँव वालों को जब पूरी बात पता चली, तो वे और भी प्रभावित हुए। रामदीन ने धनिया को और अच्छे से रखने का निश्चय किया।
कुछ समय बाद गाँव में एक बड़ी सभा हुई। मुखिया ने सबके सामने कहा,
“आज हमें इस बकरी से एक बड़ी सीख मिली है। ताकत से नहीं, बुद्धि से बड़ी-बड़ी समस्याएँ हल होती हैं।”
धनिया अब सिर्फ एक बकरी नहीं रही थी। वह गाँव की समझदारी और सावधानी की प्रतीक बन गई थी। बच्चे उससे सीख लेते कि हर परिस्थिति में घबराना नहीं चाहिए, बल्कि सोच-समझकर निर्णय लेना चाहिए।
कहानी से मिलने वाली की शिक्षा:
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि
बुद्धि और धैर्य से काम लिया जाए, तो सबसे बड़ी मुसीबत से भी बचा जा सकता है। लालच और चालाकी हमेशा हारती है, लेकिन समझदारी और सच्चाई की जीत होती है।
इसीलिए कहा गया है-
“बुद्धि बल से बड़ी होती है।”

Comments
Post a Comment