“घात लगाना” मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग/ Ghat Lagana Meaning In Hindi
Ghat Lagana Muhavare Ka Arth Aur Vakya Prayog / घात लगाना मुहावरे का क्या मतलब होता है?
मुहावरा: “घात लगाना”।
(Muhavara- Ghaat Lagana)
अर्थ- मौका ताकना / किसी को नुकसान पहुंचाने के लिए उचित समय की प्रतिक्षा करना ।
(Arth/Meaning in Hindi- Mauka Takana / Kisi Ko Nuksan Pahuchane Ke Liye Uchit Samay Ki Pratiksha Karna)
“घात लगाना” मुहावरे का अर्थ/व्याख्या इस प्रकार है-
परिचय:
हिंदी भाषा में मुहावरों का विशेष महत्व है। मुहावरे भाषा को केवल रोचक ही नहीं बनाते, बल्कि भावों को प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करने में भी सहायता करते हैं। ऐसा ही एक प्रचलित और अर्थपूर्ण मुहावरा है “घात लगाना”। यह मुहावरा सामान्य बोलचाल, साहित्य, समाचार और कहानियों में खूब प्रयोग किया जाता है। इसका प्रयोग प्रायः नकारात्मक भाव या छलपूर्ण उद्देश्य को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।
मुहावरे का शाब्दिक अर्थ:
“घात लगाना” में घात का अर्थ होता है—छिपकर किया जाने वाला वार या हमला, और लगाना का अर्थ होता है—करना या बैठाना। इस प्रकार शाब्दिक रूप से “घात लगाना” का अर्थ हुआ—छिपकर हमला करने के लिए अवसर की प्रतीक्षा करना।
यह शब्द प्राचीन युद्ध पद्धति से जुड़ा हुआ है, जहाँ सैनिक या शत्रु दल जंगल, पहाड़ या किसी छिपे स्थान पर बैठकर सही समय की प्रतीक्षा करता था और अवसर मिलते ही अचानक हमला कर देता था।
मुहावरे का भावार्थ (अर्थ):
“घात लगाना” मुहावरे का भावार्थ है—
किसी व्यक्ति को नुकसान पहुँचाने, धोखा देने या पराजित करने के लिए चुपचाप अवसर का इंतज़ार करना।
आज के समय में इसका प्रयोग केवल शारीरिक आक्रमण के लिए ही नहीं, बल्कि मानसिक, सामाजिक, आर्थिक या राजनीतिक नुकसान पहुँचाने के संदर्भ में भी किया जाता है। जब कोई व्यक्ति बाहर से मित्रता या सज्जनता दिखाए, लेकिन भीतर ही भीतर दूसरे को हानि पहुँचाने की योजना बना रहा हो, तब कहा जाता है कि वह “घात लगाए बैठा है”।
मुहावरे की व्याख्या:
“घात लगाना” मुहावरा मानव स्वभाव के उस पक्ष को उजागर करता है, जिसमें छल, ईर्ष्या, द्वेष और स्वार्थ छिपा होता है। यह मुहावरा इस बात का संकेत देता है कि खतरा हमेशा सामने से ही नहीं आता, कई बार वह छिपकर भी वार करता है।
समाज में ऐसे अनेक उदाहरण देखने को मिलते हैं जहाँ कोई व्यक्ति सफलता, पद या सम्मान को देखकर जलन में आ जाता है और सही मौके की तलाश में रहता है। वह सीधे विरोध न करके पर्दे के पीछे रहकर साजिश रचता है। ऐसे ही व्यवहार को “घात लगाना” कहा जाता है।
राजनीति में यह मुहावरा विशेष रूप से प्रचलित है। नेता एक-दूसरे के विरुद्ध खुलकर कुछ न कहकर, अवसर मिलते ही विरोधी की कमजोरी पर प्रहार करते हैं। व्यापार जगत में भी प्रतिस्पर्धी कंपनियाँ एक-दूसरे पर “घात लगाने” की रणनीति अपनाती हैं, जैसे सही समय पर बाजार में सस्ता उत्पाद उतारना या गुप्त जानकारी का लाभ उठाना।
साहित्य और कथाओं में प्रयोग:
हिंदी साहित्य में “घात लगाना” मुहावरे का प्रयोग अनेक स्थानों पर हुआ है। कहानियों और उपन्यासों में खलनायक अक्सर नायक को नुकसान पहुँचाने के लिए घात लगाए रहता है। रामायण और महाभारत जैसे महाकाव्यों में भी ऐसे प्रसंग मिलते हैं जहाँ शत्रु छिपकर वार करने की योजना बनाते हैं। इससे यह मुहावरा और भी प्रभावशाली बन जाता है।
नैतिक दृष्टिकोण:
“घात लगाना” नकारात्मक प्रवृत्ति का प्रतीक है। यह मुहावरा हमें सावधान रहने की शिक्षा देता है कि हर मुस्कान के पीछे सद्भावना नहीं होती। साथ ही यह भी संदेश देता है कि छल और कपट से प्राप्त सफलता स्थायी नहीं होती। जो लोग दूसरों पर घात लगाते हैं, वे अंततः स्वयं भी किसी न किसी रूप में उसका परिणाम भुगतते हैं।
“घात लगाना” मुहावरे का वाक्य प्रयोग / Ghaat Lagana Muhavare Ka Vakya Prayog.
1.जंगल में शिकारी हिरण पर घात लगाए बैठा था।
2.दुश्मन सेना पहाड़ियों के पीछे घात लगाकर बैठी थी।
3.वह बाहर से मित्र बनता है, लेकिन भीतर ही भीतर घात लगाए रहता है।
4.चोर अंधेरा होते ही घर में घात लगाने की योजना बना रहे थे।
5.राजनीति में कई नेता एक-दूसरे पर घात लगाए रहते हैं।
6.व्यापारी ने अपने प्रतिद्वंद्वी को नुकसान पहुँचाने के लिए घात लगाई।
7.सफलता देखकर कुछ लोग जलन में घात लगाने लगते हैं।
8.शेर झाड़ियों में छिपकर अपने शिकार पर घात लगाता है।
9.विरोधी टीम हमारी हार का इंतज़ार कर घात लगाए बैठी थी।
10.पड़ोसी उसकी संपत्ति पर कब्जा करने के लिए घात लगाए था।
11.दुष्ट राजा साधु के प्राण लेने के लिए घात लगाए बैठा था।
12.वह हर समय मौका देखकर मुझ पर घात लगाने की सोचता रहता है।
13.समाज में कुछ लोग दूसरों की बदनामी के लिए घात लगाते हैं।
14.आतंकवादी निर्दोष लोगों पर घात लगाकर हमला करते हैं।
15.पुराने मित्र ने ही विश्वासघात कर घात लगाई।
16.कंपनी के कर्मचारी बॉस की गलती पर घात लगाए बैठे थे।
17.चोर पुलिस से बचकर दुकानदार पर घात लगाना चाहता था।
18.शत्रु ने पीठ पीछे से घात लगाकर हमला किया।
19.वह शांत दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर घात लगाए रहता है।
20.राजनीति में अवसर मिलते ही विरोधी पर घात लगा दी जाती है।
21.जंगल में डाकू यात्रियों पर घात लगाकर लूट करते थे।
22.कुछ लोग मित्रता की आड़ में घात लगाने का काम करते हैं।
23.उसकी तरक्की रोकने के लिए कई लोग घात लगाए बैठे थे।
24.दुश्मनों ने रात के अंधेरे में घात लगाई।
25.शिकारी ने सही समय देखकर घात लगाया।
26.रिश्तेदार ही संपत्ति के लिए घात लगाए बैठे थे।
27.युद्ध में शत्रु ने कुटिलता से घात लगाई।
28.कुछ लोग दूसरों की असफलता पर घात लगाए रहते हैं।
29.वह हर हाल में मुझे फँसाने के लिए घात लगाए था।
30.घात लगाने वालों से हमेशा सावधान रहना चाहिए।
निष्कर्ष:
अंततः कहा जा सकता है कि “घात लगाना” एक ऐसा मुहावरा है जो छिपे हुए शत्रु, कपटी सोच और अवसरवादी व्यवहार को दर्शाता है। यह मुहावरा हमारी भाषा को सशक्त बनाता है और जीवन की सच्चाइयों से परिचित कराता है। इसके माध्यम से हम न केवल किसी स्थिति का सटीक वर्णन कर पाते हैं, बल्कि समाज और मनुष्य की प्रवृत्तियों को भी गहराई से समझ सकते हैं।
इस प्रकार “घात लगाना” मुहावरा हिं
दी भाषा की भाव-सम्पन्नता और अभिव्यक्ति की शक्ति का सुंदर उदाहरण है।
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