“घर फूंक कर तमाशा देखना” मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Ghar Phoonk Kar Tamasha Dekhna Meaning In Hindi
Ghar Phoonk Kar Tamasha Dekhna Muhavare Arth Aur Vakya Prayog / घर फूंक कर तमाशा देखना मुहावरे का क्या मतलब है?
मुहावरा: “घर फूँककर तमाशा देखना”।
(Muhavara- Ghar Phoonk Kar Tamasha Dekhna)
अर्थ: अपना घर स्वयं उजाड़ना / अपना नुकसान खुद करना ।
(Arth/Meaning in Hindi- Apna Ghar Svayam Ujadana / Apna Nuksan Khud Karna)
“घर फूंक कर तमाशा देखना” मुहावरे का अर्थ/व्याख्या इस प्रकार है-
परिचय:
हिंदी भाषा में मुहावरों का विशेष महत्व है। ये मुहावरे कम शब्दों में गहरी बात कहने की क्षमता रखते हैं और भाषा को प्रभावशाली, जीवंत तथा अर्थपूर्ण बनाते हैं। ऐसा ही एक प्रसिद्ध मुहावरा है— “घर फूँककर तमाशा देखना”। यह मुहावरा मानव व्यवहार की एक नकारात्मक प्रवृत्ति को उजागर करता है और जीवन में विवेक, जिम्मेदारी तथा दूरदर्शिता के महत्व को रेखांकित करता है।
शाब्दिक अर्थ:
इस मुहावरे का शाब्दिक अर्थ है— अपने ही घर को आग लगा देना और फिर उसे जलते हुए तमाशे की तरह देखना। स्पष्ट है कि कोई भी समझदार व्यक्ति ऐसा नहीं करेगा, क्योंकि घर व्यक्ति की सुरक्षा, आश्रय और जीवन की आधारशिला होता है। अपने ही घर को नष्ट कर देना घोर मूर्खता का प्रतीक है।
भावार्थ:
भावार्थ में यह मुहावरा ऐसे व्यक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है जो अपने ही हितों, साधनों या प्रतिष्ठा को नुकसान पहुँचाकर दूसरों को प्रभावित करने या क्षणिक आनंद लेने का प्रयास करता है। अर्थात् जो व्यक्ति अपने ही नुकसान की कीमत पर दिखावा करता है या बिना परिणाम सोचे कोई कदम उठाता है, उसके लिए यह मुहावरा उपयुक्त है।
मुहावरे की व्याख्या:
“घर फूँककर तमाशा देखना” मूलतः आत्म-विनाशकारी मानसिकता को दर्शाता है। यह उस प्रवृत्ति की ओर संकेत करता है जिसमें व्यक्ति क्षणिक उत्तेजना, अहंकार, क्रोध या दिखावे के कारण अपने भविष्य को दाँव पर लगा देता है। कई बार लोग दूसरों को नीचा दिखाने, बदला लेने या समाज में चर्चा में रहने के लिए ऐसे कदम उठा लेते हैं जो अंततः उन्हीं के लिए हानिकारक सिद्ध होते हैं।
उदाहरण के लिए, कोई व्यक्ति गुस्से में आकर अपनी अच्छी नौकरी छोड़ देता है, बिना यह सोचे कि आगे जीवन कैसे चलेगा। बाद में वही व्यक्ति बेरोजगारी और आर्थिक संकट से जूझता है। ऐसे व्यक्ति के व्यवहार को “घर फूँककर तमाशा देखना” कहा जा सकता है।
सामाजिक संदर्भ:
समाज में यह मुहावरा अनेक परिस्थितियों में सटीक बैठता है। आज के समय में जब लोग सोशल मीडिया पर दिखावे और तात्कालिक प्रसिद्धि के पीछे भाग रहे हैं, तब कई बार वे अपनी निजता, सम्मान और भविष्य को स्वयं ही नुकसान पहुँचा देते हैं। यह भी “घर फूँककर तमाशा देखने” जैसा ही व्यवहार है।
राजनीति, व्यापार और पारिवारिक जीवन में भी इस मुहावरे की प्रासंगिकता दिखाई देती है। कोई व्यापारी यदि केवल प्रतिस्पर्धी को नुकसान पहुँचाने के लिए घाटे का सौदा करता है और अंत में स्वयं ही बर्बाद हो जाता है, तो यह उसी श्रेणी में आता है। इसी प्रकार परिवार में आपसी अहंकार के कारण रिश्तों को तोड़ देना भी इसी मानसिकता को दर्शाता है।
साहित्यिक महत्व:
हिंदी साहित्य में मुहावरों का प्रयोग पात्रों के स्वभाव और परिस्थितियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है। “घर फूँककर तमाशा देखना” जैसे मुहावरे लेखक को यह बताने में सहायता करते हैं कि कोई पात्र कितना अविवेकी, अहंकारी या आत्मघाती निर्णय लेने वाला है। यह मुहावरा पाठक के मन में तुरंत एक स्पष्ट चित्र खड़ा कर देता है।
नैतिक शिक्षा:
इस मुहावरे के माध्यम से हमें यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी कार्य को करने से पहले उसके परिणामों पर विचार करना आवश्यक है। आवेग, क्रोध या दिखावे में लिया गया निर्णय व्यक्ति के पूरे जीवन को प्रभावित कर सकता है। विवेकहीन होकर अपने ही साधनों को नष्ट करना बुद्धिमानी नहीं, बल्कि मूर्खता है।
“घर फूँककर तमाशा देखना” मुहावरे का वाक्य प्रयोग नीचे दिए गए हैं—
1.बिना सोचे-समझे नौकरी छोड़ देना घर फूँककर तमाशा देखने जैसा है।
2.अपनी ही बचत उड़ा कर दोस्तों को दिखावा करना घर फूँककर तमाशा देखना कहलाता है।
3.गुस्से में आकर रिश्ते तोड़ लेना घर फूँककर तमाशा देखने जैसा व्यवहार है।
4.परीक्षा से पहले पढ़ाई छोड़ देना घर फूँककर तमाशा देखने के समान है।
5.अपनी प्रतिष्ठा खराब कर के चर्चा में आना घर फूँककर तमाशा देखना है।
6.केवल बदला लेने के लिए अपना नुकसान करना घर फूँककर तमाशा देखना कहलाता है।
7.क्रोध में आकर व्यापार बंद कर देना घर फूँककर तमाशा देखने जैसा है।
8.माता-पिता की सलाह न मानना और भविष्य बिगाड़ना घर फूँककर तमाशा देखना है।
9.छोटी-सी बात पर बड़ा नुकसान कर लेना घर फूँककर तमाशा देखने का उदाहरण है।
10.अपनी ही मेहनत पर पानी फेर देना घर फूँककर तमाशा देखना कहलाता है।
11.अहंकार में आकर मित्रों को खो देना घर फूँककर तमाशा देखने जैसा है।
12.नियम तोड़कर अपनी ही मुश्किलें बढ़ाना घर फूँककर तमाशा देखना है।
13.दिखावे के लिए कर्ज लेना और बाद में पछताना घर फूँककर तमाशा देखना कहलाता है।
14.अपनी गलती से करियर खराब करना घर फूँककर तमाशा देखने जैसा है।
15.दूसरों को नीचा दिखाने के चक्कर में खुद गिर जाना घर फूँककर तमाशा देखना है।
16.जल्दबाजी में लिया गया गलत निर्णय घर फूँककर तमाशा देखने जैसा हो सकता है।
17.पढ़ाई छोड़कर समय बर्बाद करना घर फूँककर तमाशा देखना कहलाता है।
18.अपनी ही छवि खराब करना घर फूँककर तमाशा देखने का उदाहरण है।
19.आवेश में आकर सच छुपाना घर फूँककर तमाशा देखना है।
20.सोच-समझकर न बोलना और अपमान सहना घर फूँककर तमाशा देखना कहलाता है।
21.अपनी ताकत कमजोर कर लेना घर फूँककर तमाशा देखने जैसा है।
22.छोटी जीत के लिए बड़ा नुकसान करना घर फूँककर तमाशा देखना है।
23.जिम्मेदारी से भागना घर फूँककर तमाशा देखने का ही रूप है।
24.अपनी ही प्रगति रोक देना घर फूँककर तमाशा देखना कहलाता है।
25.भावनाओं में बहकर गलत कदम उठाना घर फूँककर तमाशा देखना है।
26.भविष्य की चिंता किए बिना आज को बिगाड़ना घर फूँककर तमाशा देखने जैसा है।
27.खुद की गलती से अवसर खो देना घर फूँककर तमाशा देखना कहलाता है।
28.क्रोध में आकर सच को नकारना घर फूँककर तमाशा देखना है।
29.अपनी ही मेहनत का मज़ाक उड़ाना घर फूँककर तमाशा देखने जैसा है।
30.विवेक छोड़कर किया गया हर कार्य घर फूँककर तमाशा देखना कहलाता है।
निष्कर्ष:
अंततः कहा जा सकता है कि “घर फूँककर तमाशा देखना” मुहावरा मानव जीवन की एक गंभीर सच्चाई को उजागर करता है। यह हमें चेतावनी देता है कि अपने ही नुकसान की कीमत पर कोई भी कार्य करना समझदारी नहीं है। जीवन में संतुलन, धैर्य और दूरदर्शिता अत्यंत आवश्यक हैं। यदि हम अपने “घर” अर्थात् अपने जीवन, सम्मान और भविष्य की रक्षा करेंगे, तभी हम सच्चे अर्थों में सुखी और सफल बन सकेंगे।
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