“चतुर चिड़िया” हिंदी शिक्षाप्रद कहानी / Chatur Chidiya Hindi Story
Hindi Kahani Chatur Chidiya / हिंदी कहानी चतुर चिड़िया / चतुर चिड़िया कहानी ।
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| Chatur Chidiya |
कहानी: चतुर चिड़िया
बहुत समय पहले की बात है। एक हरा-भरा जंगल था। उस जंगल में ऊँचे-ऊँचे पेड़, मीठे फल, रंग-बिरंगे फूल और तरह-तरह के जानवर रहते थे। उसी जंगल के बीचों-बीच एक बहुत पुराना और विशाल बरगद का पेड़ था। उस पेड़ की शाखाओं पर कई चिड़ियाँ अपना घोंसला बनाकर रहती थीं।
उन्हीं चिड़ियों में से एक थी नन्ही चिड़िया “चिन्नी”। चिन्नी देखने में छोटी जरूर थी, लेकिन उसकी आँखों में चमक और दिमाग में समझदारी भरी हुई थी। वह बाकी चिड़ियों की तरह केवल उड़ना और दाना चुगना ही नहीं जानती थी, बल्कि हर बात को ध्यान से देखती, समझती और फिर सही निर्णय लेती थी।
चिन्नी बहुत मिलनसार थी। वह सभी से प्रेम से बात करती थी—चाहे वह कबूतर हो, तोता हो, गिलहरी हो या खरगोश। लेकिन उसके साथ-साथ वह बहुत सतर्क भी रहती थी। उसकी माँ उसे हमेशा समझाया करती थी—
“बेटी, जंगल में रहना है तो केवल ताकत नहीं, बुद्धि भी चाहिए।”
चिन्नी अपनी माँ की हर बात को दिल से मानती थी।
एक दिन जंगल में हलचल मच गई। सभी जानवर डरे-सहमे इधर-उधर भाग रहे थे। चिन्नी ने देखा कि हिरण तेज़ी से दौड़ रहे हैं, खरगोश अपने बिलों में छिप रहे हैं और बंदर पेड़ों पर चढ़कर शोर मचा रहे हैं।
चिन्नी ने अपनी सहेली मैना से पूछा— “मैना, क्या हुआ? सब इतने परेशान क्यों हैं?”
मैना ने डरते हुए कहा— “जंगल में एक चालाक लोमड़ी आ गई है। वह जानवरों को बहला-फुसलाकर फँसा लेती है और फिर उन्हें नुकसान पहुँचाती है।”
यह सुनकर चिन्नी गंभीर हो गई। उसने सोचा— “अगर यह लोमड़ी यूँ ही जंगल में घूमती रही, तो सभी जानवरों को खतरा होगा।”
लोमड़ी बहुत शातिर थी। वह मीठी-मीठी बातें करके जानवरों को अपने जाल में फँसा लेती थी। कभी कहती— “मैं तुम्हारी मित्र हूँ।”
तो कभी कहती— “मैं तुम्हें सुरक्षित जगह दिखाऊँगी।”
कई भोले जानवर उसकी बातों में आ जाते और फिर पछताते।
एक दिन लोमड़ी ने चिन्नी को देखा। उसने सोचा— “यह चिड़िया तो बहुत छोटी है, इसे पकड़ना आसान होगा।”
लोमड़ी बोली— “ओ छोटी चिड़िया! तुम इतनी अकेली क्यों उड़ रही हो? मेरे साथ चलो, मैं तुम्हें बहुत मीठे फल दिखाऊँगी।”
चिन्नी ने लोमड़ी की आँखों में झाँका। उसे उसकी बातों में मिठास तो दिखी, लेकिन नीयत में खोट साफ दिखाई दे गया।
चिन्नी मुस्कराई और बोली— “लोमड़ी बहन, आपके फल तो बहुत अच्छे होंगे, लेकिन मेरी माँ ने मना किया है कि मैं किसी अजनबी के साथ न जाऊँ।”
लोमड़ी ने फिर कोशिश की— “अरे! मैं अजनबी नहीं हूँ, मैं तो इस जंगल की पुरानी निवासी हूँ।”
चिन्नी ने चतुराई से कहा— “अगर आप पुरानी निवासी हैं, तो आपको तो मेरे बरगद वाले पेड़ के नीचे बनी झील के बारे में जरूर पता होगा।”
लोमड़ी चुप हो गई, क्योंकि ऐसी कोई झील थी ही नहीं।
चिन्नी समझ गई कि लोमड़ी झूठ बोल रही है। वह तुरंत उड़कर ऊँची डाल पर जा बैठी और जोर से बोली— “सावधान! यह लोमड़ी झूठी और चालाक है। इसकी बातों में मत आना!”
चिन्नी की आवाज़ सुनकर सारे जानवर इकट्ठा हो गए। लोमड़ी घबरा गई, लेकिन फिर भी उसने कहा— “यह चिड़िया झूठ बोल रही है।”
तभी बूढ़े कछुए ने कहा— “चिन्नी बहुत समझदार है। इसने कभी किसी को धोखा नहीं दिया। हमें इसकी बात सुननी चाहिए।”
चिन्नी ने सब जानवरों से कहा— “डरने से कुछ नहीं होगा। हमें मिलकर इस लोमड़ी को सबक सिखाना होगा।”
उसने एक योजना बनाई। अगले दिन सभी जानवरों ने ऐसा दिखाया जैसे वे लोमड़ी की बातों में आ गए हों।
लोमड़ी बहुत खुश हुई और सोचने लगी— “अब सब मेरे बस में हैं।”
लेकिन जैसे ही लोमड़ी आगे बढ़ी, हाथी ने रास्ता रोक लिया, बंदरों ने ऊपर से शोर मचाया, और भालू ने ज़ोर से दहाड़ लगाई।
लोमड़ी डर गई और जंगल छोड़कर भाग गई।
सभी जानवर खुशी से झूम उठे। उन्होंने चिन्नी को धन्यवाद दिया।
हिरण बोला— “अगर तुम न होती, तो हम सब मुसीबत में पड़ जाते।”
चिन्नी ने विनम्रता से कहा— “मैंने कुछ खास नहीं किया। मैंने बस वही किया जो सही था।”
उस दिन से जंगल में शांति लौट आई। चिन्नी की समझदारी की चर्चा पूरे जंगल में होने लगी। बच्चे जानवर उससे सीखने लगे और बड़े उसका सम्मान करने लगे।
इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि—
1.आकार या ताकत से नहीं, बुद्धि से बड़ी जीत होती है।
2.मीठी बातों में आकर किसी पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए।
3.सतर्कता और समझदारी हमें बड़े खतरे से बचा सकती है।
4.मिलजुलकर किया गया प्रयास हर समस्या का समाधान होता है।
और इस तरह छोटी-सी चतुर चिड़िया ने अपनी बुद्धिमानी से पूरे जंगल को बचा लिया।

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