“आलसी गधा” हिंदी शिक्षाप्रद कहानी / Aalsi Gadha Hindi Story
Aalsi Gadha Hindi Kahani / Kahani Aalsi Gadha / हिंदी कहानी आलसी गधा ।
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| Aalsi Gadha |
कहानी: आलसी गधा
बहुत समय पहले की बात है। एक छोटा-सा गाँव था। गाँव के चारों तरफ हरे-भरे खेत, ऊँचे-ऊँचे पेड़ और साफ-सुथरी पगडंडियाँ थीं। उसी गाँव में रामू नाम का एक किसान रहता था। रामू बहुत मेहनती था। वह रोज़ सुबह सूरज निकलने से पहले उठ जाता, अपने खेतों में काम करता और शाम को थका-हारा घर लौटता। रामू के पास एक गधा भी था। उसी गधे की वजह से यह कहानी मशहूर हुई।
उस गधे का नाम था मोटू। मोटू देखने में बड़ा, मजबूत और स्वस्थ था, लेकिन एक बड़ी समस्या थी—वह बहुत आलसी था। इतना आलसी कि अगर आलस की कोई प्रतियोगिता होती, तो मोटू पहले नंबर पर आता।
मोटू को बस तीन काम पसंद थे—
खाना, सोना और आराम करना।
सुबह होते ही जब रामू उसे उठाने आता, मोटू आँखें खोलकर फिर बंद कर लेता। अगर रामू कहता,
“मोटू, उठ जा बेटा, खेत जाना है,”
तो मोटू धीरे से दाएँ करवट बदल लेता।
रामू उसे प्यार से समझाता,
“देख मोटू, अगर तू काम करेगा तो शाम को तुझे स्वादिष्ट भूसा मिलेगा।”
यह सुनकर मोटू एक आँख खोलता, लेकिन फिर सोचता,
“अभी तो बहुत नींद आ रही है, भूसा तो बाद में भी मिल जाएगा।”
और फिर खर्राटे भरने लगता।
गाँव के बच्चे मोटू को देखकर हँसते थे। वे कहते,
“देखो-देखो, आलसी गधा आ रहा है!”
कुछ बच्चे मोटू की नकल करते हुए ज़मीन पर बैठ जाते और कहते,
“हम तो मोटू हैं, हमें काम नहीं करना।”
बूढ़े लोग सिर हिलाकर कहते,
“इतना तगड़ा गधा है, लेकिन काम के नाम पर शून्य।”
रामू को कभी-कभी बुरा लगता, लेकिन वह मोटू से बहुत प्यार करता था। वह सोचता,
“कोई बात नहीं, एक दिन मोटू समझ जाएगा।”
मोटू काम से बचने के लिए रोज़ नए-नए बहाने बनाता था।
कभी वह कहता,
“आज मेरे पैर में दर्द है।”
कभी वह लँगड़ाकर चलता और दिखाता कि उसे बहुत तकलीफ है।
रामू दया करके उसे आराम दे देता।
कभी मोटू कहता,
“आज बहुत गर्मी है, मैं बीमार हो जाऊँगा।”
तो कभी वह ठंड में काँपने का नाटक करता।
रामू हर बार मान जाता।
असल में मोटू को पता था कि रामू का दिल बहुत नरम है।
एक दिन गाँव में मेला लगने वाला था। रामू को मेले से अनाज और कुछ सामान लाना था। इसके लिए उसे मोटू की बहुत ज़रूरत थी।
रामू सुबह-सुबह मोटू के पास गया और बोला,
“मोटू, आज बहुत ज़रूरी काम है। हमें मेले जाना है।”
मोटू ने यह सुना और ज़मीन पर लेट गया। उसने सोचा,
“मेला? मतलब बहुत दूर चलना पड़ेगा। नहीं-नहीं, यह काम मेरे बस का नहीं।”
उसने आँखें बंद कर लीं और साँसें धीरे-धीरे चलाने लगा, जैसे वह गहरी नींद में हो।
रामू ने बहुत कोशिश की, लेकिन मोटू टस से मस नहीं हुआ।
रामू बहुत परेशान हुआ। अगर वह मेले नहीं जाता, तो घर के लिए जरूरी सामान नहीं आ पाता।
उसने सोचा,
“क्या करूँ? मोटू के बिना यह काम मुश्किल है।”
तभी गाँव का एक बुज़ुर्ग, जिनका नाम था काकाजी, वहाँ आए।
उन्होंने सारी बात सुनी और मुस्कराए।
काकाजी बोले,
“रामू, चिंता मत कर। मैं मोटू को काम पर लगा दूँगा।”
रामू हैरान हुआ।
“काकाजी, यह गधा बहुत आलसी है, यह किसी की नहीं सुनता।”
काकाजी हँसते हुए बोले,
“देखना, यह खुद चलकर जाएगा।”
काकाजी मोटू के पास गए। उन्होंने प्यार से उसके सिर पर हाथ फेरा और बोले,
“अरे मोटू, आज तो बहुत मज़ा आने वाला है।”
मोटू ने एक आँख खोली।
“मज़ा? कैसा मज़ा?” उसने मन ही मन सोचा।
काकाजी बोले,
“मेले में बहुत मीठी-मीठी चीज़ें हैं। वहाँ सबसे अच्छा भूसा मिलता है। लेकिन वह सिर्फ़ मेहनती जानवरों को मिलता है।”
यह सुनते ही मोटू के कान खड़े हो गए।
“सबसे अच्छा भूसा?”
काकाजी ने आगे कहा,
“आलसी गधों को वहाँ से भगा दिया जाता है।”
अब मोटू डर गया।
उसने सोचा,
“अगर मैं नहीं गया, तो मुझे अच्छा भूसा नहीं मिलेगा!”
धीरे-धीरे वह उठ खड़ा हुआ।
मोटू ने पहली बार बिना ज़्यादा बहाने बनाए रामू के साथ चलना शुरू किया।
रास्ते में उसे बहुत थकान लगी, लेकिन वह चलता रहा।
पहली बार उसने देखा कि रास्ते कितने सुंदर हैं—पेड़, पक्षी, नदी।
वह सोचने लगा,
“मैं तो हमेशा सोता रहता था, यह सब कभी देखा ही नहीं।”
मेले में पहुँचकर रामू ने अपना काम किया।
मोटू को सच में बहुत अच्छा भूसा मिला।
उस दिन के बाद मोटू ने थोड़ा-थोड़ा काम करना शुरू किया।
वह अब भी पूरी तरह मेहनती नहीं बना था, लेकिन पहले से बहुत अच्छा था।
गाँव के बच्चे अब उसे देखकर कहते,
“देखो, मोटू अब काम कर रहा है!”
रामू बहुत खुश था।
वह रोज़ मोटू से कहता,
“शाबाश मोटू, तू बहुत अच्छा गधा है।”
एक दिन मोटू ने फिर आलस किया।
रामू ने उसे समझाया, लेकिन मोटू नहीं माना।
उसी दिन तेज़ बारिश आ गई।
मोटू खेत में फँस गया और बहुत परेशान हुआ।
तब उसे समझ आया कि
“अगर मैं काम करता और समय पर घर लौट आता, तो यह मुसीबत नहीं आती।”
उस दिन के बाद मोटू ने तय कर लिया कि वह आलसी नहीं रहेगा।
वह रोज़ समय पर उठता, काम करता और फिर आराम करता।
अब उसका जीवन बेहतर हो गया था।
वह स्वस्थ भी रहने लगा और खुश भी।
कहानी की सीख:
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि—
आलस हमें पीछे कर देता है।
मेहनत करने से ही सुख और सम्मान मिलता है।
जो बच्चे मेहनत करते हैं, वही आगे बढ़ते हैं।
और जो आलस करते हैं, उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

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