“नाकाम मोहब्बत” हिंदी कविता, शायरी / Hindi Poetry Nakam Mohabbat

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   Nakam Mohabbat Hindi Kavita Shayari / Hindi Kavita Nakam Mohabbat / हिंदी शायरी नाकाम मोहब्बत।   Nakam Mohabbat Hindi Poetry   कविता- “नाकाम मोहब्बत” तेरी यादों के साए में, मैं अक्सर खो जाता हूँ, भीड़ में रहते हुए भी, तन्हा-सा हो जाता हूँ। तेरे ख्यालों की बारिश, हर पल मुझ पर बरसती है, दिल की हर एक धड़कन, बस तेरा नाम ही कहती है। कभी जो हँसते थे हम, चाँदनी रातों के नीचे, आज वही चाँद भी लगता है, जैसे हो मुझसे खींचे। तेरी बातें, तेरी हँसी, सब कुछ जैसे सपना था, जो अपना था कभी दिल से, अब बस एक अफसाना था। मैंने चाहा तुझे इतना, जितना खुद को भी नहीं, तू ही मेरी दुनिया थी, और कोई भी नहीं। पर शायद मेरी किस्मत को, ये मंज़ूर न था, तेरे साथ चलना मेरे लिए, लिखा ही न था। तेरी आँखों में जो चमक थी, अब किसी और के लिए है, मेरी हर एक उम्मीद अब, टूटकर बिखरी हुई है। मैंने हर दर्द को अपने, चुपचाप सह लिया, तेरे बिना जीने का हुनर भी, जैसे सीख लिया। मोहब्बत मेरी सच्ची थी, इसमें कोई कमी न थी, बस तेरी चाहत में शायद, मेरी कोई जगह न थी। मैंने हर लम्हा तेरे नाम कर दिया था, और तूने उसे बस एक खेल ...

"अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई" मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Ande Seve Koi Bachhe Leve Koi Meaning In Hindi


Ande Seve Koi Bachhe Leve Koi Muhavare Ka Arth Aur Vakya Prayog / अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

  

"अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई" मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Ande Seve Koi Bachhe Leve Koi Meaning In Hindi
Ande Seve Koi Bachhe Leve Koi



मुहावरा- “अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई”।


( Muhavara- Ande Seve Koi Bachhe Leve Koi )



अर्थ- किसी के मेहनत का फल कोई दूसरा उठाये / परिश्रम कोई और करे और इनाम कोई दूसरा पा जाए । 


( Arth/Meaning in Hindi- Kisi Ke Mehnat Ka Phal koi Dusra Uthaye / Parishram Koi Aur Kare Aur Inam Koi Dusra Pa Jaye )




“अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई” मुहावरे का अर्थ/व्याख्या इस प्रकार है-


परिचय


हिंदी भाषा में मुहावरे और कहावतें न केवल भाषा को सुंदर और प्रभावी बनाते हैं, बल्कि इनमें जीवन के गहरे अनुभव और सत्य छिपे होते हैं। इन्हीं में से एक महत्वपूर्ण और विचारणीय मुहावरा है – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।" इस मुहावरे का प्रयोग तब किया जाता है जब किसी व्यक्ति को परिश्रम का फल किसी और को मिल जाता है। यह जीवन की उस कड़वी सच्चाई को दर्शाता है, जिसमें मेहनत एक व्यक्ति करता है, लेकिन लाभ कोई दूसरा उठा लेता है।


मुहावरे का अर्थ और भावार्थ


मुहावरे का शाब्दिक अर्थ है –

"कोई व्यक्ति मेहनत करता है, संघर्ष करता है, लेकिन जब फल प्राप्त करने का समय आता है, तो कोई और उसका लाभ उठा लेता है।"


इस मुहावरे का प्रयोग तब किया जाता है, जब किसी व्यक्ति के कठिन परिश्रम, त्याग और संघर्ष का फायदा कोई दूसरा उठा लेता है। इसे अन्याय, शोषण और हक मारने से भी जोड़ा जाता है।


उदाहरण:


1. किसान साल भर खेत में मेहनत करता है, लेकिन बिचौलिये उसकी फसल सस्ते में खरीदकर ऊंचे दामों पर बेचते हैं। यही स्थिति दर्शाती है कि –

"अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"

2. किसी कंपनी में एक कर्मचारी पूरी लगन से काम करता है, लेकिन प्रमोशन किसी और को मिल जाता है। यह भी इस कहावत का उदाहरण है।


मुहावरे की उत्पत्ति और ऐतिहासिक संदर्भ


इस मुहावरे की उत्पत्ति का संबंध प्रकृति और ग्रामीण जीवन से जोड़ा जा सकता है।


पक्षियों की दुनिया में: कई बार ऐसा देखा गया है कि एक पक्षी अंडे देता है और उन्हें सेहता (सेता) है, लेकिन किसी अन्य पक्षी या शिकारी जानवर द्वारा उन अंडों को उठा लिया जाता है या उनके बच्चे चुरा लिए जाते हैं।


मनुष्य के संदर्भ में: जब एक व्यक्ति कठिन परिश्रम करता है, लेकिन परिणाम या सफलता का श्रेय किसी और को मिल जाता है, तब यह कहावत चरितार्थ होती है।


इतिहास में: भारत के इतिहास में भी कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं, जहां राजा-महाराजाओं ने युद्ध लड़ा, लेकिन अंततः सत्ता पर कोई और काबिज हो गया। उदाहरण के लिए, कई स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए कुर्बानी दी, लेकिन सत्ता का आनंद कुछ गिने-चुने नेताओं ने लिया।


मुहावरे का उपयोग और सामाजिक परिप्रेक्ष्य


यह मुहावरा उन परिस्थितियों में प्रयुक्त होता है, जहां परिश्रम और त्याग किसी व्यक्ति का होता है, लेकिन फल किसी और को मिल जाता है। यह कई सामाजिक क्षेत्रों में देखने को मिलता है –


1. राजनीति में


राजनीति में यह बहुत आम बात है कि कोई व्यक्ति संघर्ष करता है, आंदोलन चलाता है, लेकिन सत्ता किसी और को मिल जाती है।


उदाहरण:

कई नेता जनता के हित में कार्य करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद सत्ता कोई और हथिया लेता है।


2. नौकरी और व्यापार में


कई कंपनियों में कर्मचारियों की कड़ी मेहनत से कंपनी को सफलता मिलती है, लेकिन जब वेतन वृद्धि या प्रमोशन की बात आती है, तो उच्च अधिकारी इसका लाभ ले जाते हैं।


उदाहरण:

एक कर्मचारी दिन-रात मेहनत करता है, लेकिन बॉस श्रेय खुद ले लेता है।


कोई व्यक्ति व्यापार शुरू करता है, लेकिन जैसे ही वह सफल होता है, उसका कोई साझेदार उसे धोखा देकर मालिक बन जाता है।


3. शिक्षा के क्षेत्र में


अक्सर विद्यार्थी कठिन परिश्रम करते हैं, लेकिन उच्च पदों पर वे लोग पहुंच जाते हैं, जो सिफारिश या घूस का सहारा लेते हैं।


उदाहरण:

टॉप करने वाला छात्र संघर्ष करता है, लेकिन किसी अन्य प्रभावशाली व्यक्ति का बेटा सरकारी नौकरी पा जाता है।


4. खेल और मनोरंजन में


खेलों में भी कई बार मेहनत करने वाला खिलाड़ी नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि कम योग्य व्यक्ति को टीम में शामिल कर लिया जाता है।


उदाहरण:

कई टैलेंटेड खिलाड़ी कड़ी मेहनत करते हैं, लेकिन टीम में चयन किसी सिफारिश वाले खिलाड़ी का हो जाता है।


5. किसान और मजदूर वर्ग में


भारत में किसानों और मजदूरों के संदर्भ में यह मुहावरा विशेष रूप से लागू होता है। वे पूरे साल मेहनत करते हैं, लेकिन उनके उत्पाद का लाभ बड़े व्यापारी या कंपनियां उठा लेती हैं।


उदाहरण:

किसान फसल उगाता है, लेकिन असली मुनाफा बिचौलिए और व्यापारी कमा लेते हैं।


साहित्य, सिनेमा और लोककथाओं में संदर्भ


यह मुहावरा हिंदी साहित्य, फिल्मों और लोककथाओं में भी देखने को मिलता है।


1. साहित्य में:


प्रेमचंद की कहानियों में किसानों और मजदूरों के शोषण की चर्चा होती है, जो इस कहावत को सटीक रूप से दर्शाती है।


हरिशंकर परसाई और शरद जोशी ने अपने व्यंग्य साहित्य में ऐसे अनेक उदाहरण दिए हैं।


2. फिल्मों में:


हिंदी फिल्मों में कई बार यह दर्शाया जाता है कि एक गरीब व्यक्ति मेहनत करता है, लेकिन सफलता किसी अमीर या प्रभावशाली व्यक्ति को मिलती है।


"गंगाजल" और "शूल" जैसी फिल्मों में ईमानदार पुलिसकर्मी मेहनत करते हैं, लेकिन उनके अफसर श्रेय ले लेते हैं।


3. लोककथाओं में:


कई भारतीय लोककथाओं में राजा मेहनत करने वाले किसान की जमीन छीन लेता है, जो इस मुहावरे का आदर्श उदाहरण है।


मुहावरे का नैतिक और दार्शनिक दृष्टिकोण


यह मुहावरा केवल एक कहावत नहीं, बल्कि जीवन का कड़वा सत्य भी है। यह हमें सिखाता है कि –


1. दुनिया हमेशा न्यायपूर्ण नहीं होती।

2. कई बार मेहनत करने के बावजूद श्रेय नहीं मिलता।

3. हमें अपने अधिकारों के लिए लड़ना चाहिए।

4. ईमानदारी से काम करना जरूरी है, लेकिन अपने हक की रक्षा करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।



मुहावरा "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई" का वाक्य प्रयोग / Ande Seve Koi Bachhe Leve Koi Muhavare Ka Vakya Prayog. 


1. रामू ने सालों तक दुकान चलाई, लेकिन जैसे ही कारोबार अच्छा हुआ, उसके रिश्तेदार ने दुकान हथिया ली – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


2. किसानों ने दिन-रात मेहनत कर फसल उगाई, लेकिन मुनाफा बड़े व्यापारी ले गए – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


3. मोहन ने कंपनी के लिए कई प्रोजेक्ट पूरे किए, लेकिन प्रमोशन किसी और को मिल गया – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


4. गरीब मजदूर ने मकान बनाया, लेकिन उसमें रहने का सुख ठेकेदार ने लिया – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


5. उसने राजनीति में संघर्ष किया, लेकिन टिकट किसी और को मिल गया – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


6. छोटे व्यापारियों ने मेहनत की, लेकिन बड़ी कंपनियों ने उनका बाजार छीन लिया – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


7. पिता ने पूरी जिंदगी संघर्ष किया, लेकिन संपत्ति पर कब्जा बेटे ने कर लिया – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


8. श्रमिकों ने पूरी बिल्डिंग बनाई, लेकिन उसमें रहने का सुख अमीरों को मिला – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


9. लेखक ने किताब लिखी, लेकिन प्रसिद्धि पब्लिशर को मिली – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


10. गरीब शिक्षक ने छात्रों को पढ़ाया, लेकिन उनकी सफलता का श्रेय कोचिंग संस्थान को मिल गया – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


11. वैज्ञानिकों ने दिन-रात मेहनत कर खोज की, लेकिन अविष्कार का श्रेय बड़े उद्योगपतियों को मिला – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


12. राम ने पूरा क्रिकेट मैच खेला, लेकिन मैन ऑफ द मैच किसी और को मिला – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


13. किसानों ने खेतों में पसीना बहाया, लेकिन फायदा दलालों को मिला – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


14. नौकरी के लिए दिन-रात मेहनत की, लेकिन सिफारिशी व्यक्ति को नौकरी मिल गई – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


15. छोटा व्यापारी दुकान चलाता रहा, लेकिन जब व्यापार बढ़ा, तो उसे किसी बड़े व्यापारी ने खरीद लिया – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


16. गरीब कलाकार ने चित्र बनाए, लेकिन उसकी कला से कोई और अमीर हो गया – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


17. गरीबों ने शहर बसाया, लेकिन सुविधा का लाभ अमीरों को मिला – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


18. गाँव वालों ने सड़क बनाने के लिए मेहनत की, लेकिन उद्घाटन किसी नेता ने किया – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


19. एक इंजीनियर ने कंपनी के लिए सॉफ्टवेयर बनाया, लेकिन उसके बॉस ने पूरी सफलता खुद ले ली – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


20. पिता ने बच्चों के लिए सब कुछ त्याग दिया, लेकिन बुढ़ापे में बच्चे उन्हें छोड़कर चले गए – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


21. एक व्यक्ति ने मंदिर बनवाया, लेकिन नाम किसी और का जोड़ा गया – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


22. मेहनत किसी और की थी, लेकिन सरकारी योजना का लाभ किसी और को मिल गया – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


23. गरीब संगीतकार ने रचना की, लेकिन गाने का श्रेय बड़े गायक को मिला – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


24. छोटे किसान ने नई तकनीक अपनाई, लेकिन फायदा बड़ी कंपनियों को हुआ – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


25. लड़ाई गरीब सैनिकों ने लड़ी, लेकिन विजय का जश्न राजा ने मनाया – "अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई।"


इस प्रकार, यह मुहावरा विभिन्न जीवन परिस्थितियों में प्रयोग किया जाता है, जहां मेहनत कोई और करता है और लाभ कोई और उठा लेता है।


निष्कर्ष


"अंडे सेवे कोई, बच्चे लेवे कोई" एक ऐसा मुहावरा है, जो सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक जीवन की वास्तविकता को दर्शाता है। यह मेहनत और शोषण के बीच के संघर्ष को उजागर करता है। यह मुहावरा हमें सिखाता है कि सिर्फ मेहनत करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने हक की रक्षा करना भी जरूरी है।


अगर समाज में न्याय और पारदर्शिता बढ़ानी है, तो इस कहावत की सच्चाई को बदलने की जरूरत है, ताकि हर व्यक्ति को उसकी मेहनत का पूरा फल मिल सके।



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