“नाकाम मोहब्बत” हिंदी कविता, शायरी / Hindi Poetry Nakam Mohabbat
Nakam Mohabbat Hindi Kavita Shayari / Hindi Kavita Nakam Mohabbat / हिंदी शायरी नाकाम मोहब्बत।
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| Nakam Mohabbat Hindi Poetry |
कविता- “नाकाम मोहब्बत”
तेरी यादों के साए में, मैं अक्सर खो जाता हूँ,
भीड़ में रहते हुए भी, तन्हा-सा हो जाता हूँ।
तेरे ख्यालों की बारिश, हर पल मुझ पर बरसती है,
दिल की हर एक धड़कन, बस तेरा नाम ही कहती है।
कभी जो हँसते थे हम, चाँदनी रातों के नीचे,
आज वही चाँद भी लगता है, जैसे हो मुझसे खींचे।
तेरी बातें, तेरी हँसी, सब कुछ जैसे सपना था,
जो अपना था कभी दिल से, अब बस एक अफसाना था।
मैंने चाहा तुझे इतना, जितना खुद को भी नहीं,
तू ही मेरी दुनिया थी, और कोई भी नहीं।
पर शायद मेरी किस्मत को, ये मंज़ूर न था,
तेरे साथ चलना मेरे लिए, लिखा ही न था।
तेरी आँखों में जो चमक थी, अब किसी और के लिए है,
मेरी हर एक उम्मीद अब, टूटकर बिखरी हुई है।
मैंने हर दर्द को अपने, चुपचाप सह लिया,
तेरे बिना जीने का हुनर भी, जैसे सीख लिया।
मोहब्बत मेरी सच्ची थी, इसमें कोई कमी न थी,
बस तेरी चाहत में शायद, मेरी कोई जगह न थी।
मैंने हर लम्हा तेरे नाम कर दिया था,
और तूने उसे बस एक खेल समझ लिया था।
अब न कोई शिकवा है, न कोई गिला रहा,
तेरे जाने के बाद बस, ये दिल खाली-सा रहा।
तेरी यादों के सहारे, अब ये जिंदगी कटती है,
हर मुस्कान के पीछे, एक खामोशी छुपती है।
कभी जो सोचा था साथ, वो ख्वाब अधूरा रह गया,
दिल का हर एक कोना, जैसे सूना रह गया।
मैंने चाहा था तुझे, पूरी सच्चाई के साथ,
पर तूने छोड़ दिया मुझे, अधूरी सी हर बात।
अब ये नाकाम मोहब्बत, मेरी पहचान बन गई,
मेरी हर एक शायरी, तेरी ही दास्तान बन गई।
मैं लिखता हूँ हर दर्द को, अपने अल्फाज़ों में,
तू बसती है अब भी कहीं, मेरे हर एहसासों में।
शायद किसी और जनम में, हम फिर मिल जाएं,
जहाँ न कोई दूरी हो, न कोई जुदाई आए।
पर इस जनम की कहानी, यहीं खत्म हो गई,
मेरी मोहब्बत अधूरी, और नाकाम हो गई।
फिर भी दिल के किसी कोने में, एक उम्मीद जिंदा है,
कि तू कभी तो समझेगी, ये प्यार कितना सच्चा है।
पर अब मैं भी सीख गया हूँ, खुद से प्यार करना,
नाकाम मोहब्बत के बाद भी, मुस्कुराकर जीना।

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