“घास न डालना” मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Ghas Na Dalna Meaning In Hindi

  Ghas Na Dalna Muhavare Ka Arth Aur Vakya Prayog / घास न डालना मुहावरे का क्या मतलब होता है? मुहावरा: “घास न डालना”। (Muhavara- Ghas Na Dalna) अर्थ- बिल्कुल भी महत्व न देना / नजरंदाज करना / ध्यान न देना । (Arth/Meaning in Hindi- Bilkul Bhi Mahatva Na Dena / Nazarandaz Karna / Dhyan Na Dena) “घास न डालना” मुहावरे का अर्थ/व्याख्या इस प्रकार है- परिचय: हिंदी भाषा में मुहावरों का विशेष महत्व है। मुहावरे भाषा को प्रभावशाली, संक्षिप्त और भावपूर्ण बनाते हैं। इन्हीं प्रचलित मुहावरों में से एक है — ‘घास न डालना’। यह मुहावरा सामान्य बोलचाल में बहुत अधिक प्रयोग किया जाता है और किसी व्यक्ति की उपेक्षा या अनदेखी करने की भावना को व्यक्त करता है। मुहावरे का शाब्दिक अर्थ: यदि ‘घास न डालना’ को शब्दों में समझें तो इसका सीधा अर्थ होगा — किसी पशु को घास न देना। जैसे गाय, भैंस या घोड़े को यदि घास न दी जाए तो इसका अर्थ है कि उसकी देखभाल नहीं की जा रही या उसे महत्व नहीं दिया जा रहा। मुहावरे का वास्तविक (भावार्थ) अर्थ: ‘घास न डालना’ का भावार्थ है — किसी व्यक्ति की बिल्कुल परवाह न करना, उसकी ओर ध्यान न दे...

“प्रेम-ग्रंथ” गांव के दो प्रेमियों की कहानी / Hindi Love Story Prem Granth

 

Hindi Kahani Prem Granth / प्रेमग्रन्थ हिंदी कहानी ।

“प्रेम-ग्रंथ” गांव के दो प्रेमियों की कहानी / Hindi Love Story Prem Granth
"Prem-Granth" Hindi Love Story




परिचय


फिल्म प्रेमग्रंथ एक सामाजिक और रोमांटिक कहानी है, जो परंपराओं, जाति-प्रथा, और परिवारिक दबाव के बीच पनपते प्रेम की कहानी बयां करती है। कहानी में दिखाया गया है कि सच्चा प्रेम कैसे सामाजिक बाधाओं को पार कर सकता है।


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पहला भाग: आरंभ


स्थान: राजस्थान का एक छोटा सा गाँव।


कहानी की शुरुआत में दर्शकों को गाँव की खूबसूरत प्राकृतिक छटा दिखाई जाती है। वहीं पर मुख्य पात्र, आरव (एक मेहनती और सीधा-सादा किसान) और सिया (गाँव की सरपंच की बेटी) का परिचय होता है।


पहली मुलाकात


आरव और सिया की पहली मुलाकात गाँव के मेले में होती है। सिया अपने दोस्तों के साथ झूला झूल रही होती है, तभी अचानक झूला अटक जाता है। आरव उसे बचाता है। उनकी पहली मुलाकात में ही एक दूसरे के प्रति आकर्षण झलकता है।


सिया: (हँसते हुए) तुम्हारा नाम क्या है?

आरव: आरव। और तुम्हारा?

सिया: सिया।


धीरे-धीरे उनकी मुलाकातें बढ़ती हैं।


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दूसरा भाग: प्रेम का विकास


स्थान: गाँव के खेत, मंदिर और नदी का किनारा।


आरव और सिया एक-दूसरे से मिलने के लिए बहाने ढूँढते हैं। खेतों में काम करते हुए, मंदिर में पूजा करते हुए, और कभी-कभी नदी किनारे, दोनों अपने दिल की बातें करते हैं।


आरव: (मुस्कुराते हुए) अगर तुम मेरे साथ हो, तो मुझे दुनिया की कोई परवाह नहीं।

सिया: (शरमाते हुए) मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूँ।


उनका प्यार परवान चढ़ता है, लेकिन उनकी खुशी ज्यादा दिन तक नहीं टिकती।


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तीसरा भाग: विरोध और संघर्ष


स्थान: सिया का घर


सिया के पिता धरम सिंह (गाँव के प्रभावशाली सरपंच) को उनके रिश्ते के बारे में पता चल जाता है। वह इसे अपने परिवार की इज्जत के खिलाफ मानते हैं।


धरम सिंह: (गुस्से में) यह रिश्ता कभी नहीं हो सकता। हमारी जाति और उनकी जाति में जमीन-आसमान का फर्क है।


धरम सिंह सिया पर दबाव डालते हैं कि वह आरव से रिश्ता तोड़ दे। सिया टूट जाती है, लेकिन वह आरव से मिलकर अपने दिल की बात कहती है।


सिया: (रोते हुए) हमारे प्यार को समाज कभी मंजूर नहीं करेगा।

आरव: (संकल्पित) अगर हमारा प्यार सच्चा है, तो हमें किसी की परवाह नहीं करनी चाहिए।


आरव और सिया भागने का फैसला करते हैं, लेकिन गाँववाले और धरम सिंह उन्हें पकड़ लेते हैं।


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चौथा भाग: पंचायत का फैसला


गाँव में पंचायत बुलाई जाती है। पंचायत के सामने आरव और सिया अपने प्यार की दास्तां बताते हैं।


आरव: प्यार कोई गुनाह नहीं है। हम दोनों एक-दूसरे से सच्चा प्यार करते हैं।

सिया: हमें अलग करना हमारी आत्माओं को मारने जैसा होगा।


लेकिन धरम सिंह और उनके समर्थक इस रिश्ते को नामंजूर कर देते हैं। पंचायत में दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस होती है।


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पाँचवां भाग: परिवर्तन और स्वीकृति


पंचायत के कुछ बुजुर्ग और मुखिया इस बात पर जोर देते हैं कि समय बदल चुका है।


मुखिया: (गंभीर स्वर में) प्यार में जाति या धर्म की कोई सीमा नहीं होनी चाहिए। हमें अपनी सोच बदलनी होगी।


धीरे-धीरे गाँववाले इस रिश्ते को स्वीकार कर लेते हैं। धरम सिंह भी अपनी बेटी की खुशी के आगे झुक जाते हैं।


धरम सिंह: (आँखों में आँसू) मेरी हार नहीं, ये मेरे दिल की जीत है।


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अंतिम भाग: सुखद अंत


आरव और सिया की शादी गाँव के मंदिर में होती है। पूरे गाँव के लोग इस शादी में शामिल होते हैं।


सिया: (खुश होकर) देखो, हमारा प्यार जीत गया।

आरव: (सिया का हाथ थामते हुए) क्योंकि सच्चा प्यार कभी हारता नहीं।


फिल्म का अंत खुशी और उत्सव के साथ होता है।


अंतिम दृश्य: आरव और सिया गाँव के उसी बरगद के पेड़ के नीचे बैठते हैं, जो उनके प्यार का गवाह रहा है।


अंत


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संभावित संदेश


प्रेमग्रंथ यह संदेश देती है कि प्यार हर बंधन से ऊपर है। चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएँ, सच्चा प्यार कभी नहीं हारता। समाज को अपनी पुरानी सोच बदलने की जरूरत है।




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