“चमड़ी जाए पर दमड़ी ना जाए” मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Chamdi Jaye Par Damdi Na Jaye Meaning In Hindi

  Chamadi Jaye Par Damadi Na Jaye Muhavara Ka Arth Aur Vakya Prayog / चमड़ी जाये पर दमड़ी ना जाए मुहावरे का क्या मतलब होता है? मुहावरा: “चमड़ी जाए पर दमड़ी ना जाए”। (Muhavara- Chamdi Jaye Par Damdi Na Jaye) अर्थ: अत्यधिक कंजूस होना ।  (Arth/Meaning In Hindi- Atyadhik Kanjoos Hona) प्रस्तावना: हिंदी भाषा में मुहावरों का विशेष महत्व होता है। मुहावरे भाषा को प्रभावशाली, रोचक और जीवंत बनाते हैं। इनके प्रयोग से कम शब्दों में गहरी बात कही जा सकती है। “चमड़ी जाए पर दमड़ी ना जाए” एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है, जो मनुष्य के स्वभाव में मौजूद अत्यधिक कंजूसी को दर्शाता है। यह मुहावरा ऐसे व्यक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है जो धन के प्रति इतना मोह रखता है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी पैसा खर्च करना पसंद नहीं करता। मुहावरे का शाब्दिक अर्थ: इस मुहावरे में “चमड़ी” का अर्थ शरीर की त्वचा से है और “दमड़ी” पुराने समय के एक बहुत छोटे सिक्के को कहा जाता था। शाब्दिक रूप से इसका अर्थ है — चाहे शरीर को कष्ट हो जाए, लेकिन एक छोटी-सी रकम भी खर्च न करनी पड़े। यह अतिशयोक्ति के माध्यम से व्यक्ति की अत्यधिक...

आग में घी डालना मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Aag Me Ghee Dalna Meaning In Hindi

 

Aag Me Ghee Dalna Muhavare Ka Arth Aur Vakya Prayog / आग में घी डालना मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

 

आग में घी डालना मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Aag Me Ghee Dalna Meaning In Hindi
Aag Me Ghee Dalna





मुहावरा- “आग में घी डालना” ।


(Muhavara- Aag Me Ghee Dalna)



अर्थ- क्रोधित व्यक्ति को उकसाना / क्रोध भड़काना / झगड़े को और बढ़ाना / क्रोध को और अधिक भड़काना / विवाद को और बढ़ाना ।


(Arth/Meaning- Krodhit Vyakti Ko Uksana / Krodh Bhadkana / Jhagde Ko Aur Badhana / Krodh Ko Aur Adhik Bhadkana / ViVad Ko Aur Badhana)





“आग में घी डालना” मुहावरे का अर्थ/व्याख्या इस प्रकार है-



आग में घी डालना” यह हिंदी भाषा में बोले जाने वाला एक महत्वपूर्ण मुहावरा है । इस मुहावरे का अर्थ किसी क्रोधित व्यक्ति को और उकसाना अथवा किसी हो रहे विवाद को और बढ़ा देना होता है । 


इस मुहावरे का मतलब है किसी मुश्किल स्तिथि में और भी बड़ी मुश्किलें डाल देना । यह मुहावरा आमतौर पर किसी की चुनौती को और भी बढ़ाने के लिए उपयोग किया जाता है ।


जैसा कि हम सब जानते हैं, जब आग में घी डाला जाता तो तुरंत ही वह आग और तेज़ जलने लगती है । मतलब की आग में घी डालते ही उसकी लौं और तेज़ भभक उठती है । उसी प्रकार जब दो व्यक्तियों के मध्य हो रहे विवाद को और बढ़ा दिया जाए तो उस स्तिथि में हम कह सकते हैं इनके मध्य “आग में घी डालने” का काम हुआ है । 


इस मुहावरे को एक उदाहरण के माध्यम से समझते है -


दीपक और रमेश का झगड़ा खत्म होने ही वाला था तब तक कालिंदी ने उन दोनो के बीच “आग में घी डालने” का काम कर दिया । 


दीपक और रमेश एक अच्छे दोस्त थे । पर उन दोनो को एक ही लड़की पसंद थी जिसका नाम कालिंदी था । बात ही बात में जब दोनों को पता चला कि वो एक ही लड़की को पसंद करते है तो वो आपस मे बहस करने लगे । उनका बहस तुरंत झड़गे में बदल गया । पर कुछ देर बाद उनका झड़गा शांत होने ही वाला था तब तक वहा पर कालिंदी आ गयी । कालिंदी ने जब झगड़े की वजह जानी तो वो उनके बीच ये कह कर झगड़ा और बढ़ा दिया कि तुम दोनों मे से जो भी फाइट में जीतेगा मै उसी से दोस्ती करूंगी । फिर क्या था वो दोनों कालिंदी से दोस्ती करने के लिए फिर से आपस मे भिड़ गये और फाइट करने लगे । इस प्रकार से कालिंदी ने दीपक और रमेश के बीच  “आग में घी डालने” का काम कर दिया ।




“आग में घी डालना” मुहावरे का वाक्य प्रयोग / Aag Me Ghee Dalna Muhavare Ka Vakya Prayog.



आग में घी डालना” इस मुहावरे का अर्थ नीचे दिए गये कुछ वाक्य प्रयोगो के माध्यम से समझ सकते है । जो कि इस प्रकार से है-



वाक्य प्रयोग- 1.


केशव ने कहा कि तुम सब महेश से दूर रहना क्योंकि वह हमेशा “आग में घी डालने” का काम करता है । 


जब भी कॉलेज में  कोई विवाद होता तो महेश उस विवाद को और बढ़ा देता था । जिसकी वजह से महेश को कोई पसंद नही करता था । क्योंकि वो झगड़ा लगाने में मशहूर था । यही कारण था कि केशव ने अपने मित्र मंडली से कहा की तुम सब महेश से दूर ही रहना, क्योंकि केशव का काम ही है “आग में घी डालना” ।



वाक्य प्रयोग- 2.


ग्राम सभा में जब भी किसी झड़गे को सुलझाने के लिए पंचायत होती तो, बलराम उसमें “आग में घी डालने” का काम कर देता था । 


ग्राम सभा में पाँच लोगों को पंचायत में शामिल किया गया था । जिनका काम था कि किसी भी विवाद को सुलह कराना । बलराम को उन पाँच लोगों में शामिल नही किया गया जिससे वह नाराज़ हो गया था । बलराम ने निश्चय किया कि अब मैं इन लोगों को कोई भी पंचायत को सुलह नही करवाने दूंगा । फिर क्या था जब भी कोई विवाद होता और उसपर पंचायत होती तो बलराम किसी एक के तरफ से होकर उसे और भड़का देता था । फिर वो विवाद खत्म होने के स्थान पर और बढ़ जाता था । अर्थात कि बलराम का काम ही यही था कि किसी भी विवाद को बढ़ा देना मतलब की “आग में घी डालना” । 



वाक्य प्रयोग- 3.


महाभारत में सकूनी हमेशा दुर्योधन के क्रोध को और भड़का देता था । अर्थात कि सकूनी दुर्योधन के क्रोध के समय “आग में घी डालने” का कार्य बहोत ही सरलता से करता था । 


दुर्योधन पांडवो को देखना तक पसंद नही करता था । यही कारण है कि दुर्योधन हमेशा पांडवो को अपशब्द बोलता रहता था । और फिर जब दोनो के बीच कोई विवाद होता तो वहां सकूनी तुरंत पहुंच जाता । सकूनी प्रतीक्षा करता कि दुर्योधन कब क्रोधित होगा । और जैसे ही दुर्योधन क्रोधित होता सुकुनी उसके क्रोध को और बड़का देता था । सकूनी ऐसे तीखे शब्द बोलता जिससे दुर्योधन का क्रोध पांडवो के लिए और बढ़ जाता था । यहां पर हम ये कह सकते हैं कि सकुनी का काम ही यही था कि दुर्योधन के क्रोध को और बढ़ाना । सकुनी के इस कार्य को ही कहते है “आग में घी डालना” । 





हम आशा करते हैं कि आपको इस मुहावरे का अर्थ समझ मे आ गया होगा । अपने सुझाव देने के लिए हमें कमैंट्स जरूर करें ।



आपका दिन शुभ हो ! 🙂




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