“एक बूँद” हिंदी कविता / Ek Boond Hindi Poetry
Hindi Kavita Ek Bund / Ek Boond Hindi Kavita / कविता “एक बूँद”।
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| Hindi Poetry Ek Boond |
शीर्षक: एक बूँद...
एक बूँद गिरी थी चुपके से,
सूखी सी उस मिट्टी पर,
जैसे कोई सपना टूटा हो,
खामोशी की उस चिट्ठी पर।
एक बूँद में था दर्द छिपा,
अनकही सी कुछ बातों का,
जैसे कोई दिल रो पड़ा हो,
बोझ लिए जज़्बातों का।
एक बूँद ने पूछा धीरे,
क्यों इतना सूना संसार है,
क्यों हर चेहरे के पीछे,
छुपा हुआ इक भार है।
एक बूँद ने छूकर देखा,
पत्थर दिल भी पिघलते हैं,
थोड़ी सी गर ममता मिले,
सूखे फूल भी खिलते हैं।
एक बूँद बनी थी उम्मीद,
अंधियारे के उस कोने में,
जैसे दीपक जल उठता हो,
टूटे हुए खिलौने में।
एक बूँद ने राह दिखाई,
गिरकर भी उठ जाने की,
खोकर खुद को सिखा गई,
फिर से मुस्कुराने की।
एक बूँद ने कह दी बात,
जीवन बस बहता पानी है,
रुकना इसका काम नहीं,
चलना ही इसकी कहानी है।
एक बूँद जब सागर बनी,
खुद को फिर पहचान लिया,
छोटी सी उस दुनिया ने,
जीने का अरमान दिया।

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