“चूं न करना” मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Chu Na Karna Meaning In Hindi
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Chu Na Karna Muhavare Ka Arth Aur Vakya Prayog / चूं न करना मुहावरे का क्या मतलब होता है?
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| Chu Na Karna |
मुहावरा: “चूं न करना” ।
(Muhavara- Chu Na Karna)
अर्थ- बिल्कुल भी विरोध न करना / एकदम चुप रहना / जवाब न देना ।
(Arth/Meaning In Hindi- Bilkul Bhi Virodh Na Karna / Ekdam Chup Rahna / Jawab Na Dena)
“चूं न करना” मुहावरे का अर्थ/व्याख्या इस प्रकार हैं-
परिचय:
हिंदी भाषा में मुहावरों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। मुहावरे भाषा को अधिक प्रभावशाली, रोचक और संक्षिप्त बनाते हैं। जब हम किसी बात को सीधे-सीधे कहने के बजाय मुहावरे के माध्यम से कहते हैं, तो उसका प्रभाव अधिक गहरा हो जाता है। ऐसा ही एक प्रचलित मुहावरा है “चूं न करना”। यह मुहावरा सामान्य बोलचाल और साहित्य दोनों में काफी प्रयोग किया जाता है।
मुहावरे का अर्थ:
“चूं न करना” का अर्थ है — बिल्कुल भी विरोध न करना, आवाज न उठाना, या बिना किसी आपत्ति के चुपचाप सब कुछ सह लेना।
जब कोई व्यक्ति किसी बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता, न विरोध करता है और न ही अपनी असहमति प्रकट करता है, तब कहा जाता है कि उसने “चूं भी नहीं की” या “चूं न किया”।
इस मुहावरे में “चूं” शब्द का अर्थ बहुत हल्की आवाज या प्रतिक्रिया से है। जब कहा जाता है कि किसी ने “चूं भी नहीं की”, तो उसका मतलब होता है कि उसने ज़रा-सी भी आवाज या विरोध नहीं किया।
मुहावरे की व्याख्या:
“चूं न करना” मुहावरा उस स्थिति को व्यक्त करता है, जब कोई व्यक्ति डर, सम्मान, अनुशासन, मजबूरी या आदत के कारण बिल्कुल शांत रहता है। कई बार लोग किसी शक्तिशाली व्यक्ति के सामने बोलने से डरते हैं, इसलिए वे कुछ भी नहीं कहते। ऐसे समय में कहा जाता है कि उन्होंने “चूं भी नहीं की”।
उदाहरण के लिए, यदि कोई शिक्षक कक्षा में विद्यार्थियों को डांटता है और विद्यार्थी डर के कारण कुछ नहीं कहते, तो कहा जा सकता है कि वे “चूं भी नहीं करते”। इसी प्रकार, यदि कोई व्यक्ति किसी कठिन परिस्थिति को बिना शिकायत के सह लेता है, तब भी इस मुहावरे का प्रयोग किया जा सकता है।
यह मुहावरा अक्सर आज्ञाकारिता, डर, अनुशासन या सहनशीलता को व्यक्त करने के लिए प्रयोग होता है। कभी-कभी इसका प्रयोग व्यंग्यात्मक रूप में भी किया जाता है, जैसे जब कोई व्यक्ति बहुत दब्बू या अत्यधिक चुप रहने वाला हो।
“चूं न करना” मुहावरे का वाक्य प्रयोग / Chu Na Karna Muhavare Ka Vakya Prayog.
1.प्रधानाचार्य के सामने पूरी कक्षा चूं भी नहीं करती।
2.पिता के गुस्से के आगे बच्चे चूं तक नहीं करते।
3.पुलिस को देखते ही चोर चूं भी नहीं कर पाया।
4.शिक्षक की डांट सुनकर छात्र चूं भी नहीं बोले।
5.मालिक के सामने नौकर चूं तक नहीं करता।
6.इतनी कड़ी सजा मिलने पर भी वह चूं न कर सका।
7.दादा जी के सामने पोते चूं भी नहीं करते।
8.सख्त अधिकारी के सामने कर्मचारी चूं तक नहीं करते।
9.सैनिकों ने अपने कप्तान के आदेश पर चूं तक नहीं की।
10.माँ के डांटने पर बच्चा चूं भी नहीं करता।
11.डर के मारे वह चूं तक नहीं कर पाया।
12.अदालत में जज के सामने अपराधी चूं भी नहीं बोला।
13.गुरुजी के सामने विद्यार्थी चूं तक नहीं करते।
14.पुलिस की पूछताछ में वह चूं भी नहीं कर सका।
15.मालिक के आदेश पर मजदूरों ने चूं तक नहीं की।
16.जब राजा ने आदेश दिया तो प्रजा चूं भी नहीं कर सकी।
17.बड़े भाई के सामने छोटा भाई चूं भी नहीं करता।
18.शिक्षक की सख्ती के कारण विद्यार्थी चूं तक नहीं करते।
19.पिता के सामने वह चूं भी नहीं करता।
20.डर के कारण आरोपी चूं तक नहीं कर पाया।
निष्कर्ष:
अंत में कहा जा सकता है कि “चूं न करना” हिंदी का एक अत्यंत प्रचलित और प्रभावशाली मुहावरा है। इसका अर्थ है — बिल्कुल भी आवाज न उठाना या बिना किसी विरोध के चुप रहना। यह मुहावरा विभिन्न परिस्थितियों में प्रयोग किया जाता है, जैसे डर, अनुशासन, सम्मान या सहनशीलता के कारण किसी का शांत रहना।
हिंदी भाषा की समृद्धि में ऐसे मुहावरों का बहुत बड़ा योगदान है। इनके माध्यम से हम अपने विचारों और भावनाओं को अधिक सटीक, प्रभावशाली और रोचक ढंग से व्यक्त कर सकते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को मुहावरों का अध्ययन और उनका सही प्रयोग अवश्य सीखना चाहिए।
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