“चूं न करना” मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Chu Na Karna Meaning In Hindi

Chu Na Karna Muhavare Ka Arth Aur Vakya Prayog / चूं न करना मुहावरे का क्या मतलब होता है? मुहावरा: “चूं न करना” । (Muhavara- Chu Na Karna) अर्थ- बिल्कुल भी विरोध न करना / एकदम चुप रहना / जवाब न देना । (Arth/Meaning In Hindi- Bilkul Bhi Virodh Na Karna / Ekdam Chup Rahna / Jawab Na Dena) “चूं न करना” मुहावरे का अर्थ/व्याख्या इस प्रकार हैं-  परिचय: हिंदी भाषा में मुहावरों का बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। मुहावरे भाषा को अधिक प्रभावशाली, रोचक और संक्षिप्त बनाते हैं। जब हम किसी बात को सीधे-सीधे कहने के बजाय मुहावरे के माध्यम से कहते हैं, तो उसका प्रभाव अधिक गहरा हो जाता है। ऐसा ही एक प्रचलित मुहावरा है “चूं न करना”। यह मुहावरा सामान्य बोलचाल और साहित्य दोनों में काफी प्रयोग किया जाता है। मुहावरे का अर्थ: “चूं न करना” का अर्थ है — बिल्कुल भी विरोध न करना, आवाज न उठाना, या बिना किसी आपत्ति के चुपचाप सब कुछ सह लेना। जब कोई व्यक्ति किसी बात पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता, न विरोध करता है और न ही अपनी असहमति प्रकट करता है, तब कहा जाता है कि उसने “चूं भी नहीं की” या “चूं न किया”। इस मुहावरे में “च...

रंग में भंग पड़ना मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Rang Me Bhang Padna Meaning in Hindi


Rang Me Bhang Padna Muhavare Ka Arth Aur Vakya Prayog / रंग में भंग पड़ना मुहावरे का अर्थ क्या होता है?

रंग में भंग पड़ना मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Rang Me Bhang Padna Meaning in Hindi
Rang Me Bhang Padna




मुहावरा- “रंग में भंग पड़ना” ।


(Muhavara- Rang Me Bhang Padna)



अर्थ- उल्लास में विघ्न पड़ना / खुशी में रुकावत आ जाना / हर्ष के समय में किसी प्रकार का विघ्न पड़ जाना


(Arth/Meaning in Hindi- Ullas Me Vighn Padna / Khushi Me Rukawat Aajana / Harsh Ke Samay Me Kisi Prakar Ka Vighn Pad Jana)






“रंग में भंग पड़ना” मुहावरे का अर्थ/व्याख्या इस प्रकार है-



रंग में भंग पड़ना” यह हिंदी भाषा में प्रयोग होने वाला एक मुहावरा है । इस मुहावारे का अर्थ उल्लास में विघ्न पड़ जाना अथवा खुशी के कार्यक्रम में किसी प्रकार का रुकावत या विघ्न का आ जाना होता हैं । 



इस मुहावरे का अर्थ एक उदाहरण के माध्यम से समझते हैं -


समाज में शीक्षा के उत्थान के लिए एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम को गांव के ही कुछ पढ़े लिखे नौजवान संचालित कर रहे थे । लोगो मे इस प्रकार के कार्यक्रम को लेकर काफी ज्यादा उत्साह देखने को मिल रहा था । क्योंकि सब लोग शिक्षा का महत्व जानना चाहते थे । कार्यक्रम का जैसे ही संचालन शुरु हुआ तभी कुछ अराजक तत्वों ने मिलकर उस कार्यक्रम में रुकावत डाल दिए । देखने से प्रतित हो रहा था कि जिन लोगो ने कार्यक्रम मे विघ्न डाला है वो लोग नक्सलवादी थे, ये लोग नही चाहते थे कि समाज मे शिक्षा का उत्थान हो । इसलिए इन लोगो ने कार्यक्रम में विघ्न डाल दिया जिससे कार्यक्रम को समाप्त करना पड़ा । मतलब कि कार्यक्रम में विघ्न डालना ही अथवा रुकावट पैदा करना ही “रंग मे भंग डालना” कहलाता है ।




“रंग में भंग पड़ना” मुहावरे का वाक्य प्रयोग / Rang Me Bhang Padna Muhavare Ka Vakya Prayog.



‘रंग मे भंग पड़ना’ इस मुहावरे का अर्थ नीचे दिये गये कुछ वाक्य प्रयोगों के माध्यम से समझ सकते हैं, जो कि इस प्रकार से हैं-



वाक्य प्रयोग- 1.


होली के रंग मे डूबे हुए सभी लोग बहोत ज्यादा उत्साहित थे, पर थोड़ी ही देर में उनके उत्साह में ‘रंग में भंग पड़’ गया ।

हुआ ये था कि सब लोग होली खेल रहे थे । होली खेलते वक़्त सब लोग इतने ज्यादा खुश थे कि उनको होश ही नही था कि वे लोग किस कदर रंग में डूब चुके हैं । उन्ही मे से किसी एक युवक ने एक बुज़ुर्ग दादा जी को रंग डाल दिया । रंग पड़ने से दादा जी बहोत नाराज़ हो गये और सबको बुरा भला बोलने लगे । मामला बढ़ता हुआ देख कर कुछ लोग और इकट्ठा हो गये । दादा जी का हालत देख कर लोग उस युवक को ही डाटने लगे की तुम्हे क्या जरूरत थी इनके ऊपर रंग डालने की । किसी तरह से मामला सांत हुआ । पर अब उनका होली का रंग फिका हो चुका था । उनके खुशी मे उस युवक और दादा जी के कारण विघ्न पड़ गया । इस प्रकार से उनके उत्साह में बाधा आगयी । अर्थात लोगो के बींच में होली का जश्न मानते समय “रंग में भंग पड़” गया ।



वाक्य प्रयोग- 2.


एक मदारी वाला कुछ बंदरों और साँपो के साथ अपना मदारी दिखा रहा था । मदारी देखने के लिए बहोत सारे छोटे बच्चे जमा हुए थे और साथ मे कुछ व्यस्क लोग भी थे । मदारी वाले ने जब बंदर के साथ अपना मदारी दिखा रहा था तो बच्चे बहोत उत्साहित हो रहे थे । बच्चे अपनी खुशी तालियों के साथ व्यक्त कर रहे थे । साथ ही साथ जो और भी लोग मौजूद थे वो लोग भी ठहाके लगा कर हस रहे थे ।  मदारी दुखाते वक़्त उस मदारी वाले का एक सांप उसके पिटारे से निकल कर बाहर आ गया । जैसे ही बच्चों की नज़र उस सांप पर पड़ी तो बच्चों में भगदड़ मच गयी । सांप के निकलने की जानकारी मदारी वाले को नही हुयी इसलिए बच्चे डर कर भागने लगे । बच्चे तो अब रुकने का नाम ही नही ले रहे थे । इसलिए उस मदारी वाले को अपना तमाशा बंद करना पड़ा । उस सांप की वजह से बच्चों के खुशियों में विघ्न पड़ गया । अर्थात कि उनके खुशी के वक़्त में “रंग में भंग पड़” गया । 



वाक्य प्रयोग- 3.


रामलाल और उनके परिवार वाले बहोत ही खुश थे क्योंकि उनके लड़के की शादी होने वाली थी । घर के सभी सदस्य शादी की तैयारी करने में लगे हुए थे । समय समय पर वो लोग नृत्य कला और संगीत गायन भी कर रहे थे । अचानक थे किसी ने आवाज़ दिया कि भागो-भागो घर में आग लग गयी है । सब लोग उस आवाज़ की तरफ दौड़ने लगे । जीस कमरे मे शादी का सारा सामान रखा गया था उसी कमरे मे आग लगी थी । लोगो ने काफी प्रयास किया की आग बुझ जाए पर उनका कोसिस विफल रहा । और जबतक फायर ब्रिगेड की गाड़ी आती उससे पहले ही सब कुछ जलकर खाक हो चुका था । इस घटना से रामलाल के परिवार के खुशियों में बाधा पड़ गयी । उनके खुशीयों मे रुकावट आगयी । इस तरह से रामलाल के परिवार में  उत्साह के समय “रंग में भंग पड़ गया” ।




हम आशा करते हैं कि आपको इस मुहावरे का अर्थ समझ में आ गया होगा । अपने सुझाव देने के लिए हमें कमैंट्स जरूर करें ।



आपका दिन शुभ हो ! 😊



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