“चमड़ी जाए पर दमड़ी ना जाए” मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग / Chamdi Jaye Par Damdi Na Jaye Meaning In Hindi

  Chamadi Jaye Par Damadi Na Jaye Muhavara Ka Arth Aur Vakya Prayog / चमड़ी जाये पर दमड़ी ना जाए मुहावरे का क्या मतलब होता है? मुहावरा: “चमड़ी जाए पर दमड़ी ना जाए”। (Muhavara- Chamdi Jaye Par Damdi Na Jaye) अर्थ: अत्यधिक कंजूस होना ।  (Arth/Meaning In Hindi- Atyadhik Kanjoos Hona) प्रस्तावना: हिंदी भाषा में मुहावरों का विशेष महत्व होता है। मुहावरे भाषा को प्रभावशाली, रोचक और जीवंत बनाते हैं। इनके प्रयोग से कम शब्दों में गहरी बात कही जा सकती है। “चमड़ी जाए पर दमड़ी ना जाए” एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है, जो मनुष्य के स्वभाव में मौजूद अत्यधिक कंजूसी को दर्शाता है। यह मुहावरा ऐसे व्यक्ति के लिए प्रयोग किया जाता है जो धन के प्रति इतना मोह रखता है कि कठिन से कठिन परिस्थिति में भी पैसा खर्च करना पसंद नहीं करता। मुहावरे का शाब्दिक अर्थ: इस मुहावरे में “चमड़ी” का अर्थ शरीर की त्वचा से है और “दमड़ी” पुराने समय के एक बहुत छोटे सिक्के को कहा जाता था। शाब्दिक रूप से इसका अर्थ है — चाहे शरीर को कष्ट हो जाए, लेकिन एक छोटी-सी रकम भी खर्च न करनी पड़े। यह अतिशयोक्ति के माध्यम से व्यक्ति की अत्यधिक...

“शेर और चूहा” हिंदी शिक्षाप्रद कहानी / Sher Aur Chuha Hindi Story


Sher Aur Chooha Hindi Kahani / Hindi Kahani Sher Aur Chuha / हिंदी कहानी शेर और चूहा ।

 

“शेर और चूहा” हिंदी शिक्षाप्रद कहानी / Sher Aur Chuha Hindi Story
Sher Aur Chuha 


कहानी: शेर और चूहा

बहुत समय पहले की बात है। भारत के एक विशाल और हरे-भरे जंगल में तरह-तरह के जानवर रहते थे। उस जंगल में ऊँचे-ऊँचे साल और सागौन के पेड़ थे, जिनकी छाया में ठंडी हवा बहती रहती थी। रंग-बिरंगे फूलों से भरी झाड़ियाँ, मीठे पानी की नदियाँ और कल-कल करती धाराएँ जंगल की सुंदरता को और बढ़ा देती थीं। पक्षियों की चहचहाहट सुबह-सुबह पूरे जंगल को जगा देती थी।

उसी जंगल का राजा था — शेर महाराज सिंहराज।

सिंहराज बहुत बड़े, ताकतवर और तेजस्वी थे। उनकी सुनहरी अयाल धूप में चमकती थी और उनकी दहाड़ सुनकर बड़े-बड़े जानवर भी काँप जाते थे। जंगल के सभी जानवर उनका बहुत सम्मान करते थे, लेकिन कुछ उनसे डरते भी थे, क्योंकि सिंहराज को अपने बल और शक्ति पर बहुत घमंड था।


सिंहराज को लगता था कि इस जंगल में उनसे बड़ा कोई नहीं है।

वे अकसर कहते,

“मैं जंगल का राजा हूँ। मेरी ताकत के आगे कोई टिक नहीं सकता। छोटे जीव तो मेरे सामने कुछ भी नहीं हैं।”

उनकी इस सोच की वजह से वे कई बार छोटे जानवरों को नज़रअंदाज़ कर देते थे। उन्हें लगता था कि छोटे प्राणी कभी किसी काम के नहीं हो सकते।

उसी जंगल में एक छोटा सा चूहा भी रहता था। उसका नाम था मिट्टू।

मिट्टू बहुत नन्हा, फुर्तीला और चंचल था। उसकी आँखें चमकदार थीं और वह हमेशा कुछ न कुछ नया सीखने की कोशिश करता रहता था। जंगल के बाकी चूहे उससे थोड़ा डरते थे, क्योंकि मिट्टू बेधड़क घूमता रहता था और बड़े जानवरों से भी डरता नहीं था।


मिट्टू बहुत दयालु और समझदार था।

वह अकसर कहता,

“आकार से कोई बड़ा या छोटा नहीं होता, काम से होता है।”

वह चींटियों की मदद करता, घायल पक्षियों के लिए दाना लाता और जरूरतमंदों की सहायता करने में हमेशा आगे रहता था।

एक दिन की बात है। दोपहर का समय था। जंगल में शांति छाई हुई थी। अधिकांश जानवर अपने-अपने ठिकानों में आराम कर रहे थे। उसी समय शेर महाराज एक बड़े बरगद के पेड़ के नीचे लेटे हुए थे। शिकार करके वे थक गए थे और गहरी नींद में सो गए।


उसी समय मिट्टू खेलते-खेलते वहाँ आ पहुँचा।

वह इधर-उधर दौड़ रहा था, कभी पत्तों पर चढ़ता, कभी नीचे उतरता। अचानक उसे ज़मीन पर फैली शेर महाराज की लंबी पूँछ दिखी।

मिट्टू को शरारत सूझी।

उसने सोचा,

“देखूँ तो सही, यह राजा इतने बड़े क्यों कहलाते हैं!”

खेल-खेल में वह शेर के शरीर पर चढ़ गया और उनकी अयाल पर उछलने लगा। अचानक शेर महाराज की नींद टूट गई।


“गrrrrrr!”

शेर महाराज की ज़ोरदार दहाड़ से पूरा जंगल गूँज उठा।

उन्होंने झट से मिट्टू को अपने विशाल पंजे में पकड़ लिया।

मिट्टू डर के मारे काँपने लगा।

शेर गरजते हुए बोले,

“तू कौन है, छोटे से जीव? मेरी नींद खराब करने की हिम्मत कैसे की?”

मिट्टू ने काँपती आवाज़ में कहा,

“महाराज, मुझसे गलती हो गई। कृपया मुझे माफ कर दीजिए।”

शेर हँस पड़े।

“माफ़ी? तुझ जैसे छोटे से चूहे को मारना मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं है।”


मिट्टू ने हिम्मत जुटाई और बोला,

“महाराज, मैं छोटा ज़रूर हूँ, लेकिन हो सकता है कि एक दिन मैं आपके काम आ जाऊँ। कृपया मुझे जीवनदान दीजिए।”

यह सुनकर शेर को ज़ोर की हँसी आ गई।

“तू? मेरी मदद करेगा?”

उन्होंने मज़ाक उड़ाते हुए कहा।

लेकिन न जाने क्यों, उस दिन शेर का मन थोड़ा नरम हो गया। शायद मिट्टू की सच्चाई और साहस ने उन्हें छू लिया था।

शेर ने पंजा हटाते हुए कहा,

“ठीक है, आज तुझे छोड़ देता हूँ। लेकिन दुबारा मेरे सामने मत आना।”

मिट्टू खुशी से उछल पड़ा।

“धन्यवाद महाराज! मैं यह एहसान कभी नहीं भूलूँगा।”


दिन बीतते गए। मौसम बदलते रहे। जंगल में सब कुछ पहले जैसा चल रहा था। शेर महाराज अपने शिकार और राजकाज में व्यस्त थे, और मिट्टू अपने छोटे से संसार में।

लेकिन कहते हैं न, समय हमेशा एक जैसा नहीं रहता।

एक दिन शेर महाराज जंगल में घूम रहे थे। अचानक वे एक गहरे जाल में फँस गए, जिसे शिकारी बिछाकर गए थे। जितना वे निकलने की कोशिश करते, उतना ही जाल कसता जाता।

शेर घबरा गए।

उन्होंने ज़ोर-ज़ोर से दहाड़ लगाई, लेकिन उस समय जंगल के जानवर दूर थे।


दूर कहीं मिट्टू अपने साथियों के साथ दाना खोज रहा था।

उसे शेर की दहाड़ सुनाई दी।

वह चौंक गया।

“यह तो महाराज की आवाज़ है! जरूर कोई मुसीबत है।”

मिट्टू बिना देर किए उस दिशा में दौड़ पड़ा।


जब मिट्टू वहाँ पहुँचा, तो उसने देखा कि शेर महाराज जाल में फँसे हुए हैं। उनकी आँखों में डर था।

मिट्टू बोला,

“महाराज, घबराइए मत। मैं आपकी मदद करूँगा।”

शेर ने उसे पहचान लिया।

उन्हें अपनी पुरानी बात याद आ गई।

उन्होंने धीमी आवाज़ में कहा,

“मिट्टू, अगर तुम मेरी मदद कर सको तो मैं जीवन भर आभारी रहूँगा।”

मिट्टू तुरंत जाल को कुतरने लगा।

उसके छोटे-छोटे दाँत तेज़ी से जाल काटने लगे। थोड़ी देर में जाल ढीला पड़ गया।

अंततः शेर महाराज आज़ाद हो गए।


शेर महाराज ने मिट्टू को स्नेह से देखा।

उन्होंने कहा,

“आज तुमने मेरी जान बचाई। मैं गलत था कि छोटे जीवों को कमजोर समझता था।”

उन्होंने घोषणा की,

“आज से इस जंगल में कोई भी किसी को छोटा या बड़ा नहीं समझेगा।”


उस दिन के बाद जंगल बदल गया।

शेर और चूहा सबसे अच्छे मित्र बन गए।

शेर सबकी बात सुनने लगे और मिट्टू सबका प्रिय बन गया।


कहानी की शिक्षा:

👉 कोई भी छोटा या बड़ा नहीं होता

। समय आने पर छोटा भी बड़ा काम कर सकता है।

👉 दया और विनम्रता सबसे बड़ी ताकत होती है।




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